दो माह में इस दवा से टीवी ख़त्म करने का दवा, जल्द शुरू होगा ट्रायल

मेरठ। टीवी रोगियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कि अब इस नई दवा से दो माह में टीवी ख़त्म करने का दावा किया जा रहा है। साथ ही जल्द क्लिनिकल ट्रयाल किया जाएगा। 2025 तक भारत को टीबीमुक्त करने की दिशा में नई संभावनाएं नजर आ रही हैं। अब मेरठ इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलोजी (एमआइईटी) के फार्मेसी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. अनुराग ने टीबी की एक नई दवा तैयार की है, जो महज दो महीने में टीबी की बीमारी खत्म कर देगी। दावा है कि ये दवा वर्तमान डोज से चार गुना कारगर होगी। दुष्प्रभाव भी कम होगा। इस दवा का चूहे पर सफल ट्रायल किया गया है। अब क्लीनिकल ट्रायल के लिए फार्मा कंपनी से बात चल रही है।

ट्यूबरक्युलोसिस बैक्टीरिया हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे इंसान को संक्रमित करता है। फेफड़ों की टीबी के मरीज ज्यादा हैं, लेकिन यह बीमारी मस्तिष्क, जिगर, मुंह, गुर्दे, गर्भाशय और हड्डियों में भी देखी जाती है। हर तरह की टीबी का इलाज तो उपलब्ध है, पर छह माह से लेकर दो साल तक दवा खानी पड़ती है। प्रोफेसर अनुराग ने तीन साल के शोध के बाद टीबी की नई दवा तैयार की है। यह टीबी के इलाज में उपयोग में होने वाली दवाइयों राइफैम्पीसिन, आइसोनियाजिड और स्ट्रेप्टोमाइसिन से चार गुना अधिक प्रभावी है। डा. अनुराग ने इस दवा को विभाग के अन्य सहयोगी डा. नेहा कृष्णर्थ, डा. संतोष वर्मा के साथ मिलकर तैयार किया है।

ऐसे काम करती है यह दवा : अभी दवा का नाम नहीं तय किया है। बायोलाजिकल कोड दिया है। यह दवा टीबी के बैक्टीरिया के एन्जाइम को निष्क्रिय करती है। जिससे शरीर के अंदर बैक्टीरिया की सारी गतिविधि रुक जाती है। बाजार में उपलब्ध टीबी की दवा से यह 50 फीसद सस्ती होगी। मरीज को अधिक समय और अधिक गोलियां भी नहीं खानी पड़ेगी। दो से तीन गोली रोज ही पर्याप्त होगी। उन्होंने बताया कि अभी मानव पर क्लीनिक ट्रायल नहीं हुआ है फिर भी यह दवा दो से तीन माह में हर तरह की टीबी ठीक कर देगी। दवा में ट्राइ मीथोक्सी बेन्जोइक एसिड, सोडियम हाइड्रोक्साइड, हाइड्रोक्लोरिक टिन पाउडर आदि का इस्तेमाल हुआ है।

वरिष्ठ फिजिशियन डा. तनुराज सिरोही ने कहा: अमूमन छह माह से दो साल तक दवा चलने के बाद टीबी पूरी तरह से ठीक हो जाती है। इसमें दो माह तक चार गोलियों का कंबिनेशन चलता है फिर दो गोलियां और जुड़ जाती हैं। क्लीनिकल ट्रायल के बाद ही पता चलेगा कि दवा कितने समय के लिए कारगर होगी।

ऐसे अलग है यह दवा

डा. अनुराग के मुताबिक अभी जो टीबी की दवाएं हैं, ज्यादातर टीबी के अंदर बैक्टीरिया की सेल लेयर को बढ़ने से रोकतीं हैं। जिसमें समय लगता है। जबकि यह दवा बैक्टीरिया के सभी माइक्रो एंजाइम को निष्क्रिय कर देगी। जिसकी वजह से टीबी जल्द ठीक होने लगेगी।

चूहों पर सफल परीक्षण

कालेज की फार्मेसी लैब में दवा तैयार करने के बाद अनुराग ने इसका चूहों पर सफल परीक्षण किया। एक स्वस्थ चूहे में टीबी के बैक्टीरिया को डाला गया। स्टैंडर्ड प्रोटोकाल के तहत 1.05 मिलीग्राम की डोज एक सप्ताह तक चूहे को दी गई। सप्ताहभर में ही चूहे के भीतर के बैक्टीरिया खत्म हो गए। उस पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ा।

आठ साल से रिसर्च
डा. अनुराग ने जयपुर नेशनल यूनिवर्सटिी से फार्मेसी में पीएचडी की है। पिछले आठ साल से वह एमआइईटी के फार्मेसी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। अभी कुछ समय पहले उन्होंने कैंसर की बेहद सस्ती दवा तैयार की थी। इसके लिए भारत सरकार से 23 लाख रुपये का अनुदान भी मिल है। इस का क्लीनिकल ट्रायल बाकी है।

पेटेंट के बाद क्लीनिक ट्रायल की तैयारी

डा. अनुराग के शोध का पेटेंट हो चुका है। इस दवा के क्लीनिक ट्रायल के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए संस्थान की एक फार्मा कंपनी से बात हुई है।