दो साल बाद जिला स्तरीय दवा भंडार की जांच से मचा हड़कंप

जासं। दवा भंडार की जांच समय -समय पर होती रहती है। गौरतलब है कि जब ज्यादा दिनों में दवा भंडार की जांच होने का जिक्र भी किया जाता है तो फिर खलबली मच जाती है। पिछले 2 वर्ष से जिला स्तरीय दवा भंडार की जांच नहीं हुई थी। कितनी दवाई खाई और कितना इस्तेमाल हुआ इसका कोई डाटा नहीं है। नवागत सिविल सर्जन डॉ. वीरेंद्र कुमार चौधरी ने जांच भंडार की जांच के लिए टीम गठित किया है। टीम जांच आरंभ कर दी है, इसको लेकर जिले में खलबली मची हुई है। उन्होंने बताया कि दवा भंडार की प्रतिवर्ष जांच होनी चाहिए।

इससे उपलब्ध दवाओं का भौतिक सत्यापन होता है। सिविल सर्जन ने बताया कि फिलहाल बाढ़ के लिए जिले में पर्याप्त दवा है। बरसाती बीमारियों से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम किया गया है । जिला को पर्याप्त मात्रा में दवा प्राप्त हुई है । उसकी एंट्री कराई जा रही है। स्टोर में एंट्री होने के बाद सभी स्वास्थ्य केंद्रों को दे दी जाएगी। ताकि बाढ़ बारिश के समय स्वास्थ्य केंद्रों पर दवा की कमी नहीं हो।

सिविल सर्जन ने जिला दवा भंडार की जांच के लिए 5 सदस्य टीम गठित की है। टीम में अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, जिला यक्ष्मा प्रभारी आदि विभागीय पदाधिकारी को शामिल किया गया है। सिविल सर्जन ने बताया कि स्टोर में दवा एवं उपकरण की अद्यतन जानकारी के लिए जांच जरूरी है। कितनी दवा डिमांड की गई? कितना प्राप्त हुआ और कितनी दवाएं खर्च की गई। शेष दवा की फिलहाल स्थिति क्या है ? इसकी जानकारी हर स्तर पर रहनी चाहिए। लेकिन यहां विगत दो वर्ष से स्टोर की जांच नहीं हो पायी है। नतीजतन टीम गठित कर जांच कराई जा रही हैं।

टीम को सात दिनों के अंदर जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि जिला स्तरीय भंडार की जांच होने के बाद सभी पीएचसी स्तर के दवा स्टोर की जांच भी होगी। दो वर्ष तक दवा भंडार की जांच क्यों नहीं कराई गई , यह भी एक जांच का विषय है? हालांकि पूर्व सिविल सर्जन डॉ अरुण कुमार सिन्हा सेवानिवृत्त हो चुके हैं उनके सेवानिवृत्त होने के बाद नए सिविल सर्जन के रूप में डॉ वीरेंद्र कुमार चौधरी ने योगदान किया है।