जॉनसन एंड जॉनसन पाउडर के इस्तेमाल से कैंसर!-अमेरिकी झटके से भारत में हलचल

नई दिल्ली

अमेरिका की स्थानीय अदालत ने अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी पाउडर और शॉवर टू शॉवर के इस्तेमाल से ग्लोरिया रिस्टेसुन नाम की महिला को ऑवेरियन कैंसर (गर्भाशय का कैंसर) होने के बाद पर करोड़ों डॉलर का जुर्माना लगाकर कंपनी के उत्पादों गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। भारत जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी उत्पादों का बडा बाजार है, लेकिन यहां जांच को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। देश की विभिन्न एजेंसियों की जांच की गति बेहद धीमी चल रही है। उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान कहते हैं कि जब शिकायत आएगी, कार्रवाई करेंगे। उधर, महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने हैवी मैटल की जांच पूरी कर ली है और अन्य जांच के परिणाम का इंतजार है। जबकि अमेरिका के उत्पादों के बारे में अभी एफडीए को कंपनी की ओर से जानकारी नहीं मिली है। स्वास्थ्य मंत्रालय के ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने भी जांच कमेटी बनाई है और कंपनी से पाउडर में शामिल होने वाले तत्वों की रिपोर्ट मांगी है। कंपनी के प्रवक्ता की मानें तो, पिछले 30 वर्षों के वैज्ञानिक शोध और उसके नतीजे इस बात की पुष्टि नहीं करते हैं कि ऑवेरियन कैंसर और पाउडर में किसी प्रकार का संबंध है। कंपनी ने दावा किया कि उसके उत्पाद पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं।
महाराष्ट्र एफडीए कमिनश्नर हर्षदीप कांबले के मुताबिक, जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी पाउडर और शॉवर टू शॉवर के इस्तेमाल से गर्भाशय का कैंसर होने का जब फरवरी में अमेरिकी कोर्ट का पहला फैसला आया था, तब हमने भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) के साथ संयुक्त रूप से परीक्षण के लिए सैंपल इकठ्ठा  किया था। हमारी जांच में हैवी मेटल और अन्य कई जांच शामिल थी। हैवी मेटल की जांच नॉर्मल पाई गई। चूंकि राज्य के एफडीए के साथ ही डीसीजीआई ने भी सैंपल लिए थे। लिहाजा हम उनके टेस्ट की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
साथ ही, जॉनसन एंड जॉनसन से भारत में बिकने वाले उत्पाद और अमेरिका में बिकने वाले उत्पाद के बारे में कुछ जानकारी मांगी थी। जिससे पता चला कि भारत में बनने वाले उत्पाद का रॉ मटेरियल यहीं का होता है। मगर अमेरिका के प्रोडक्ट्स के बारे में अभी जानकारी नहीं मिली है। भारत में बेबी केयर कारोबार 92,400 करोड़ रुपए से अधिक का है। देश में जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा बनाए जा रहे बेबी केयर प्रोडक्ट में 50 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी है। अमेरिका में कोर्ट द्वारा दिए फैसले के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव एलसी शर्मा ने बताया कि इस मामले में डीसीजीआई ने जांच शुरू कर दी है।
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. जीएन सिंह ने कहा कि विभाग ने मार्च महीने में ही ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्डस (बीआईएस) को पत्र लिखकर जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी पाउडर में कार्सिनोजेनिसिटी जांच के निर्देश दिए हैं। हालांकि तीन हफ्ते की समय सीमा देने के बावजूद बीआईएस अपनी जांच रिपोर्ट विभाग को नहीं दे पाई है। उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक टेल्कम पाउडर की रिपोर्ट मिल जाएगी। हमने खुद भी एक्सपर्ट कमेटी गठित की है। जॉनसन एंड जॉनसन को लिखित में अपने टेल्कम पाउडर में इस्तेमाल होने वाले अवयवों की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। कंज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट सोसाएटी (कट्स) के महासचिव प्रदीप सिंह मेहता कहते हैं कि उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री रामविलास पासवान को पत्र लिखकर प्रोडक्ट के विभिन्न कंटेंट की जांच के लिए आग्रह किया है।
पहले भी उठती रही हैं उंगलियां
मुंबई के आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. अजीत तेलंग बताते हैं कि कंपनी के पाउडर से कैंसर का खतरा होने के संबंध में मैंने भी मुंबई हाईकोर्ट में मामला दायर किया था। कंपनी के टेल्कम पाउडर में जेनोटॉक्सिक एथेलीन ऑक्साइड है। इस कॉन्टैमिनेशन की वहज से बच्चों में कैंसर का खतरा होने की आशंका रहती है। जेनोटॉक्सिक कार्सिनोजेन संक्रमण मानव शरीर के संपर्क में आने भर से कैंसर हो सकता है। यह बच्चों के लिए हानिकारक है। तेलंग दावा करते हैं कि खुद कंपनी ने अपनी जांच में इस संक्रमण का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी कोर्ट के जुर्माने के बाद मैंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा है। वह चाहते हैं कि अमेरिकी घटना के बाद कंपनी अपने प्रोडक्ट पर बच्चों के पाउडर पर चेतावनी लिखे कि इसको प्राइवेट पार्ट पर प्रयोग करने से कैंसर हो सकता है।
भारत में पहली बार कंपनी तब विवाद में आई थी जब महाराष्ट्र एफडीए ने वर्ष 2007 में बेबी टेल्कम पाउडर में एथेलीन ऑक्साइड से स्टरलाइज्ड करने के चलते उत्पादन पर रोक लगा दी थी। इस केमिकल के बारे में माना जाता है कि इससे कैंसर होता है। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश रद्द कर दिया था। जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी पाउडर के बारे में 2014 में शिकायत मिलने पर हमने उनके मुलुंड के मैन्युफैक्चरिंग का लाइसेंस रद्द किया था। जिसके खिलाफ जॉनसन एंड जॉनसन की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की गई। एफडीए के इस आदेश पर हाईकोर्ट ने स्टे दिया हुआ है।