मध्य प्रदेश: डॉक्टरों को रिझाने की सरकारी कोशिश बेअस

भोपाल। शिवराज सरकार ने डॉक्टरों की आमद बढ़ाने के लिए पहले तो उन्हें पीजी में बोनस अंक दिया। अब उनके लिए सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में आधी सीटें आरक्षित कर दीं, लेकिन नतीजा सिफर रहा, क्योंकि अब भी प्रदेश के 757 सरकारी अस्पताल बिना डॉक्टर के हैं।
जानकारी के मुताबिक, चिकित्सकों के लिए आरक्षित आधे से ज्यादा सीटें खाली रह गईं। निजी मेडिकल कॉलेजों में सेवारत उम्मीदवारों के लिए एमडी-एमएस की 54 सीटों में से सिर्फ  5 ही भर पाई हैं। सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए दाखिले गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल में होंगे।
चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉ. जीएस पटेल के मुताबिक,  पहल चरण में दाखिले 2 से 5 मई तक हुए। दूसरे चरण की काउंसलिंग 11 मई से शुरू है। पहले चरण की बची हुई सीटें और ऑल इंडिया कोटे से रिवर्ट होकर आने वाली सीटों को इस काउंसलिंग में शामिल किया गया। सरकारी डॉक्टरों के लिए मेडिकल पीजी में पिछले साल तक 25 फीसदी सीटें आरक्षित की जा रही थीं। ये सीटें भी खाली रह जाती थीं क्योंकि दाखिले के तय न्यूनतम 50 फीसदी अंक सेवारत उम्मीदवार हासिल नहीं कर पाते थे। इसके बाद भी सरकार ने 2016-17 से उनके लिए मेडिकल पीजी में 50 फीसदी सीटें आरक्षित कर दीं। इस तरह उनके लिए 178 सीटें आरक्षित कर दी गईं, लेकिन इसके लिए सिर्फ 74 उम्मीदवार ही पास हुए। मेडिकल पीजी की सीट आवंटन होने के बाद सिर्फ 63 सीटें ही भर पाई हैं। हालत यह है कि इनके लिए सरकारी कॉलेजों में रिजर्व एमडी-एमएस की 80 सीटों में से भी सिर्फ 51 ही भरी गई हैं। डिप्लोमा कोर्स में 42 में से सिर्फ 12 सीटें ही भरी गई हैं।