कोरोना की रफ़्तार घटते ही थमी दवाओं की बिक्री, स्टाक करने वाले दवा व्यापारी परेशान

बगहा। कोरोना की दूसरी लहर के कम होते ही लगभग सभी कारोबार धीरे-धीरे ट्रैक पर आ रहे हैं। कई में तेजी भी देखी जा रही है, लेकिन पिछले तीन महीनों की तुलना में दवाओं की बिक्री काफी घट गई है। कोरोना और इम्यूनिटी बढ़ाने वाली दवाओं का कारोबार घटकर आधा हो चुका है। दरअसल हरनाटांड़ जिसे चिकित्सा के क्षेत्र का हब माना जाता है। दर्जन भर से अधिक चिकित्सक और उससे दोगुने मेडिकल स्टोर संचालित होते हैं।

कोरोना काल में एक समय ऐसा भी था जब बाजार में जरूरी दवाओं के लिए मारामारी मची हुई थी। लेकिन अब दवाओं की मांग में 80 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ गई है। इधर, बीच में एक समय ऐसा भी था जब बाजार में जरूरी दवाओं के लिए मारामारी मची हुई थी। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि अब दवाओं की मांग में भारी मात्रा में गिरावट आ गई है।

केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, हरनाटांड़ के अध्यक्ष -विश्वनाथ प्रसाद का कहना है कि बीते साल की अपेक्षा इस साल दवाओं की बिक्री में काफी तेजी आई थी। मार्च से जून तक बिक्री सही रही। लेकिन संक्रमण की रफ्तार धीमी होते ही कोरोना से जुड़ी दवाओं की बिक्री थम गई है। ऐसे में स्टॉक बर्बाद होने की संभावना बढ़ गई है। इसलिए वह दवाएं वापस करने के लिए थोक विक्रेताओं से संपर्क साध रहे हैं।

दवा विक्रेता हरनाटांड़ के मुन्ना पटवारी का कहना है कि कोरोना संक्रमण की रफ्तार काफी हद तक कम हो गई है। ऐसे में क्षेत्र में मरीज न के बराबर हैं। जिससे कोरोना संबंधित दवाओं की बिक्री काफी कम हो गई है। इसमें विटामिन सी, पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक के साथ ऑक्सीमीटर व थर्मामीटर की बिक्री में काफी कमी आई है। जिससे व्यवसाय काफी प्रभावित हुआ है।

दवा के थोक विक्रेता हरनाटांड़- मंटू यादव ने बताया कि अप्रैल महीने में दूसरी लहर आने पर कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में अचानक तेजी से वृद्धि हुई। इससे बाजार में दवाओं, इंजेक्शन और थर्मामीटर आदि की किल्लत हो गई थी। इन चीजों की व्यवस्थाएं की गई। लेकिन स्टॉक पूरा होते ही संक्रमण की रफ्तार कम हो गई। जिससे भारी मात्रा में कोरोना से संबंधित दवाएं बच गई हैं। दवा विक्रेता हरनाटांड़ के देवेंद्र राय ने बताया कि बीते एक माह के भीतर संक्रमण की रफ्तार काफी कम हो गई है। पहले की तुलना में मरीजों की संख्या भी कम हो गई है। यहीं कारण है कि दवाओं और इंजेक्शन की बिक्री करीब 80 फीसद तक घट गई है। मांग घटने से नुकसान की आशंका बढ़ गई है।

इस साल अप्रैल से लेकर जून तक दवा का कारोबार पिछले साल की तुलना में ज्यादा रहा, लेकिन दूसरी लहर का असर कम होते ही कम होता गया। सबसे अधिक गिरावट सैनिटाइजर व मल्टीविटामिन की दवाओं की बिक्री में आई है। दूसरी लहर के बाद संक्रमण दर कम होते ही दवाओं की डिमांड काफी कम हो गई है। दवा व्यापारियों के मुताबिक, कोरोना के दूसरी लहर के दौरान सैनेटाइजर एवं विटामिन सी की मांग में लगातार बढ़ोतरी होती गई और अब इसमें तेजी से गिरावट आई है। अब स्थिति यह है कि जहां सैनेटाइजर के 50 पीस बिकती थीं, वहां अब दो से चार पीस ही बिक रही हैं। इतना ही नहीं इस दौरान पल्स-ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर व ग्लूकोमीटर की बिक्री भी थम गई है।