जन औषधि केंद्र पर दवा का टोटा, गायब हुईं शुगर-बीपी और दर्द की दवाइयां

मुजफ्फरपुर। जन औषधि केंद्रों में जेनरिक दवाओं की किल्लत हो गयी है। दुकानों से मल्टीविटामिन, शुगर, बीपी और दर्द की दवाएं गायब हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोग मेडिकल स्टोर पर महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। बता दें कि मेडिकल स्टोर में मिलने वाली विटामिन सी की 20 रुपये की दवा जन औषधि केंद्रों में मात्र एक रुपया में मिलती है। विटामिन सी के अलावा सूजन को ठीक करने में काम आने वाली एंटीबायोटिक जो मेडिकल स्टोर में 49 रुपये में मिलती है, वह दवा भी लोगों को एक रुपया में मिल जाती है। इसके अलावा शुगर में काम आने वाली दवा जो मेडिकल स्टोर में 150 से 200 रुपये तक में आती है वह जेनरिक दवा में छह से 12 रुपये में मिलती है। बीपी की दवा भी लोगों को यहां पांच रुपये से शुरू होकर 20 रुपये तक मिल जाती है।

जन औषधि केंद्रों में कई दवाएं मेडिकल स्टोर से 80 से 90 प्रतिशत तक कम दर की होती हैं। जन औषधि केंद्र के संचालकों ने बताया कि दो महीने से ये दवाएं नहीं आ रही हैं। कोरोना और लॉकडाउन के समय जो आपूर्ति लड़खड़ायी वह अबतक ठीक नहीं हो सकी है। मुजफ्फरपुर में 27 जनऔषधि केंद्र चल रहे हैं। जन औषधि केंद्रों में 950 तरह की दवाएं मिलती हैं। प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के उत्तर बिहार के नोडल अफसर कुमार पाठक ने बताया कि कभी कभी डिमांड अधिक होती है और आपूर्ति कम हो जाती है। इसलिए दवाएं कम रहती हैं। कुछ दवाएं जल्द आने वाली हैं। दिल्ली और चेन्नई से दवाओं की खेप केंद्रों तक पहुंचेंगी।

जेनरिक दवाओं के लिए जन औषधिक एप से दवाओं की जानकारी मिल सकती है। इस एप को गूगल प्ले स्टोर मोबाइल में डाउनलोड किया जा सकता है। एप डाउनलोड होने के बाद इससे दवा दुकानों की भी जानकारी मिलेगी और दुकानदारों के पते और फोन नंबर भी एप से मिल जायेंगे। दवाओं को इस एप से खरीद भी सकते हैं। संचालकों के मुताबिक जेनरिक दवा दुकानों में मांग से 25 प्रतिशत कम आपूर्ति हो रही है। जन औषधि केंद्रों में ग्राहकों की संख्या ज्यादा होती है। जन औषधि केंद्रों में दिल्ली और रांची से अभी दवा आपूर्ति होती है। दिल्ली से ऑर्डर करने पर 20 दिन से एक महीने का समय दवा आने में ही लग जाता है। ट्रांसपोर्ट की लेटलतीफी भी परेशानी का सबब बनती है।

एसकेएमसीएच के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ अकिल अहमद मुमताज ने जेनरिक दवाओं पर कहा कि जेनरिक दवाएं काम तो करती हैं लेकिन यह देखा जाना जरूरी है कि दवा किस कंपनी की है। दवा अच्छी कंपनी की हो तो यह ज्यादा असरदार होगी लेकिन किसी कमजोर कंपनी की होती तो उतनी असरदार नहीं होगी। इसलिए कंपनी पर ध्यान देना जरूरी है।