डायबिटीज के इलाज के लिए भारतीय बॉयोकान की नई दवा को मिली मंजूरी

नई दिल्ली। डायबिटीज के मरीजों के लिए खुशखबरी की खबर सामने आई है। बता दें कि अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने बायोकॉन-वायट्रिस की दवा सेमग्ली को मंजूरी दे दी है। यह पहला ऐसा इंटरचेंजेबल बायोसिमिलर प्रोडक्ट है जो डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल इंसुलिन की तरह काम करता है। बेंगलुरू स्थित फार्मास्युटिकल कंपनी बायोकॉन बायोलॉजिक्स द्वारा निर्मित सेमग्ली अमेरिका में पहले से स्वीकृत और लंबे समय से इस्तेमाल किए जाने वाले इंसुलिन उत्पाद लैंटस की तरह और बायोसिमिलर इंटरचेंजेबल दोनों है।

यूएसएफडीए का कहना है कि ये इंटरचेंजेबल बायोसिमिलर दवा सुरक्षा और क्षमता के अनुसार पहले की अन्य दवाओं की तरह ही हैं और इनके क्लिनिक रिजल्ट में भी कोई अंतर नहीं है। अगर कोई मरीज पहले लैंटस लेता रहा है तो उसे सेमग्ली इस्तेमाल करने के बाद कोई फर्क नहीं महसूस होगा। दरअसल सेमग्ली को पहली बार जून 2020 में मानव इंसुलिन एनालॉग के रूप में मंजूरी मिली थी। एफडीए ने अब हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स के लिए कुछ नई सामग्रियां जारी की हैं ताकि वो इंटरचेंजेबल बायोसिमिलर प्रोडक्ट को सीख सकें। इसमें एक नई फैक्टशीट भी शामिल है जिसमें इंटरचेंजेबल बायोसिमिलर के बारे में विस्तार से समझाया गया है।

USFDA द्वारा सेमग्ली (इंसुलिन ग्लारजीन) को मंजूरी देने का मतलब है कि इसे अब सनोफी की दवा लैंटस की जगह लिया जा सकता है। मरीज अब डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना भी विकल्प के तौर पर इस दवा को मेडिकल स्टोर से खरीद सकते हैं। ये बायोसिमिलर दवा बायोकॉन बनाएगी जबकि अमेरिका में सेमग्ली की मार्केटिंग बायोकॉन की पार्टनर कंपनी वायट्रिस करेगी। USFDA के कार्यकारी आयुक्त जेनेट वुडकॉक ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘यह उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है जो डायबिटीज के इलाज के लिए रोजाना इंसुलिन पर निर्भर रहते हैं, क्योंकि बायोसिमिलर और इंटरचेंजेबल बायोसिमिलर प्रोडक्ट किफायती हैं।

वुडकॉक ने कहा, ‘पहली इंटरचेंजेबल बायोसिमिलर प्रोडक्ट को मिली मंजूरी यूएसएफडीए की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को बताती है जिसके तहत बायोलॉजिकल दवाओं को बाजार में उतारा जा रहा है। ये कम लागत पर बनी सुरक्षित, प्रभावी और अच्छी क्वालिटी वाली दवाएं हैं जो मरीजों की मदद में प्रभावी साबित होंगी। इस लंबे समय तक काम करने वाले इंसुलिन से ग्लाइसेमिक कंट्रोल में सुधार देखा जा सकता है। दुनिया भर में टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के करोड़ों मरीज हैं। कोरोना की वजह से पिछले 2 सालों में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में ये नई दवाएं मरीजों को राहत पहुंचाने का काम करेंगी।