नशा कारोबारियों के हौसले बुलंद, 8 माह में ढाई लाख नशे की गोलियां बरामद

जोधपुर। जोधपुर शहर व जिले के विभिन्न इलाकों में फल-फूल रहे नशे के कारोबार और युवाओं के बड़ी संख्या में शिकार होने से हाईकोर्ट भी चिंतित है। इसी के चलते कोर्ट ने युवाओं को नशे से बचाने के उद्देश्य से प्रसंज्ञान लिया। कोर्ट के हरकत में आने के बाद ड्रग विभाग व पुलिस कुछ समय तो सक्रिय रहे, लेकिन फिर दोनों ही महकमों के जिम्मेदारों ने सुस्ती की चादर ओढ़ ली। इससे नशे के काराेबारियों के फिर से हौसले बुलंद होने लगे। तस्करी के जरिए युवाओं तक नशे की गोलियां पहुंचाने का काम जारी है।

गत आठ महीने में पकड़ में आए चार मामलों से ही नशे की तस्करी की भयावहता उजागर हो रही है। महज आठ महीने में जोधपुर जिले के अलग-अलग इलाकों से पुलिस ने ढाई लाख से अधिक नशे की टेबलेट पकड़ी है। वहीं दूसरी ओर राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता व विजय विश्नोई की खंडपीठ में सोमवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के संबंधित विभाग के अफसरों के हलफनामा पेश करने के लिए मोहलत मांगी गई है। मामले में अगली सुनवाई 27 सितंबर को मुकर्रर की है। पंजाब-हरियाणा व दिल्ली से तस्करी कर जोधपुर में नशे की गोलियां लाई जा रही हैं।

एनसीबी व पुलिस की ओर से जिले में नशे के विरुद्ध कार्रवाई तो होती है, लेकिन इनकी सप्लाई की चेन नहीं तोड़ पाई। जिले में नशे की दवाइयां अभी भी चोरी-छिपे बेची जा रही हैं। साथ ही शहर व गांवों में जोधपुर ग्रामीण पुलिस ने पिछले आठ महीनों में चार बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। इनमें 2,49,770 नशे की गोलियां जब्त की गई। इसमें फलोदी, बाप व देचू इलाके में कार्रवाई की गई। इस दौरान कुल चार प्रकरण में छह तस्कर भी गिरफ्तार हुए।बता दें कि मारवाड़ के ग्रामीण इलाकों में प्रतिबंधित श्रेणी की दवाओं की अवैध बिक्री के सुराग मिलने पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने एक के बाद एक लगातार कार्रवाई की।

इसी कड़ी में पाल-सांगरिया बाइपास इलाके से 6 लाख से ज्यादा गोलियां बरामदगी के मामले में पांच और लोगों को गिरफ्तार किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि जोधपुर एनसीबी की इस कार्रवाई के बाद दिल्ली और लखनऊ एनसीबी टीमों के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए मथुरा के काशी, गाजियाबाद और दिल्ली सहित अन्य हिस्सों से तकरीबन 50 लाख गोलियां बरामद की जा चुकी हैं। पाल-सांगरिया बाइपास पर टीम ने 6 लाख 2 हजार 300 टैबलेट्स-कैप्सूल और 338 कफ सिरप जब्त की थी। इस मामले में प्रतिबंधित श्रेणी की इन दवाओं की सप्लाई करने वाले नेटवर्क के बारे में छानबीन शुरू की गई थी और तीन महीने की मशक्कत में टीम ने 9 जनों को गिरफ्तार किया।