रेमडेसिविर दवा के उत्पादन स्थलों की संख्या 22 से बढ़कर 62 हुई: सरकार

नई दिल्ली। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि अप्रैल-मई में बाजार में रेमडेसिविर की कमी महसूस होने के बाद उत्पादकों के 40 नए विनिर्माण स्थलों को त्वरित मंजूरी प्रदान की जिससे इस दवा के उत्पादन स्थलों की संख्या 22 से बढ़कर 62 हो गयी। उन्होंने कहा कि कोविड-19 प्रबंधन के लिए दवाओं की मांग में एकदम उछाल आने के कारण अप्रैल और मई महीनों में बाजार में रेमडेसिविर की कमी महसूस की गयी। मंडाविया ने कहा कि इस दवाई के उत्पादन में पर्याप्त वृद्धि करने के लिए भारतीय औषधि महानियंत्रक ने रेमडेसिविर के लाइसेंस प्राप्त विनिर्माताओं के 40 नए विनिर्माण स्थलों को त्वरित मंजूरी प्रदान की।

इसके परिणामस्वरूप रेमडेसिविर के उत्पादन स्थलों की संख्या बढ़कर 62 हो गयी जो मध्य-अप्रैल, 2021 में 22 थी। उन्होंने कहा कि रेमडेसिविर की घरेलू उत्पादन क्षमता मध्य-अप्रैल में प्रति माह 38.8 लाख शीशियों से बढ़कर जून, 2021 में प्रति माह 122.49 लाख शीशियों तक पहुंच गई। उन्होंने राज्यसभा में एक पूरक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी कंपनियों ने उत्पादन बढ़ाने में मदद की। इसके अलावा देश मे विनिर्मित रेमडेसिविर की घरेलू उपलब्धता को बढ़ाने के लिए इसके निर्यात पर 11 अप्रैल, 2021 को रोक लगा दी गयी।

मंडाविया ने कहा कि फार्मास्यूटिकल विभाग (डीओपी) एवं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने संयुक्त रूप से देश के सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को रेमडेसिविर के उपलब्ध भंडारों के आवंटन की कवायद शुरू की ताकि इसकी कमी को दूर किया जा सके तथा देशभर में निष्पक्ष और समान वितरण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि आज की स्थिति के अनुसार, रेमडेसिविर की मांग काफी कम हो गयी है और आपूर्ति मांग से कहीं अधिक हो गयी है।

तदनुसार, रेमडेसिविर को 14 जून, 2021 को निर्यात की निषिद्ध श्रेणी से हटाकर सीमित श्रेणी में शामिल किया गया है। राज्यों को ‘कोविड-19 दवाओं के बफर स्टॉक प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश’ जारी किए गए हैं तथा उन्हें सलाह दी गई है कि भविष्य में ऐसी किसी भी अपेक्षा को पूरा करने के लिए तैयार रहें। उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में बताया कि आयुष्मान भारत योजना एक महत्वपूर्ण योजना है और देश में इस योजना के द्वारा दस करोड़ परिवारों यानी यानी 50 करोड़ लोगों को इसका लाभ मिल रहा है।

डिसक्लेमर:यह आर्टिकल एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड हुआ है। इसे मेडिकेयर न्यूज की टीम ने एडिट नहीं किया है।