दिल्ली के सरकारी अस्पताल में 30 मरीज पर 1 नर्स

नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानदंडों के मुताबिक, हर छह मरीज पर एक नर्स होनी चाहिए, लेकिन राजधानी दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 30 मरीज पर एक नर्स है। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में नर्स की 10 से 30 प्रतिशत पोस्ट खाली हैं। इन खाली पोस्ट को भरने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। कुछ अस्पतालों में सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट लेवल पर भर्ती हो रही हैं।
वल्र्ड नर्सिंग डे के मौके पर नर्सों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आज भी उनके प्रफेशन को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। मरीजों के इलाज की सारी जिम्मेदारी उनके ऊपर होती है, लेकिन सुविधाएं बढ़ाने के लिए उन्हें स्ट्राइक का सहारा लेना पड़ता है। दिल्ली नर्सेज फेडरेशन की अध्यक्ष टी जॉय कहती हैं कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में लगभग 8000 नर्स काम कर रही हैं, जिनमें 1200 ठेके पर हैं। राजधानी की आबादी की तुलना में नर्सों की संख्या काफी कम है।
नर्सों की संख्या बढऩे पर ही नॉर्मल वॉर्ड और सुपर स्पेशिएलिटी वॉर्ड में प्राइवेट वॉर्ड के तर्ज पर मरीजों को सुविधाएं मिल पाएंगी। दिल्ली नर्सेज फेडरेशन के महासचिव लीलाधर ने कहा कि 30 से 40 प्रतिशत नर्स रिजर्व के लिए भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मॉर्निंग शिफ्ट में तो काम चल जाता है, लेकिन इवनिंग शिफ्ट और रात में इमरजेंसी के दौरान नर्सों की कमी खलती है।