दर्द निवारक दवाएं दे रहीं जिंदगी भर का दर्द, किडनी-लिवर पर डाल रही बुरा असर

कानपुर। नशे के लिए दर्द निवारक दवाएं भरपूर मात्रा में प्रयोग की जा रही हैं। भले ही क्राइम ब्रांच ने एक मेडिकल स्टोर में यह खेल पकड़ा है, मगर शहर में दर्जनों में ऐसे प्रतिष्ठान हैं, जहां बिना पर्चा नारकोटिक्स की दवाएं बेची जा रही हैं। डाक्टर के मुताबिक दर्द निवारक दवाएं अधिक मात्रा में खाने से व्यक्ति इनका आदी हो जाता है। किडनी व लिवर खराब होने से उसकी मृत्यु तक हो सकती है।

जीएसवीएम कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. गणेश शंकर मानसिक अवसाद के मरीजों के साथ-साथ ऐसे रोगियों को भी देखते हैं जो कि नशे के आदी होते हैं। उन्होंने बताया कि दर्द निवारक दवाओं में टेबलेट, सिरप और इंजेक्शन तीनों का प्रयोग नशे के लिए होता है। टेबलेट में सर्वाधिक प्रयोग पेट दर्द की दवा इस्पाज्मो प्राक्सीवान का होता है। यह प्रतिबंधित दवा है। सिरप में खांसी के लिए प्रयोग आने वाला कोडीन व कोरेक्स और नींद के लिए दिए जाने वाला इंजेक्शन लोराजीपाम व दर्द निवारक इंजेक्शन पेथाडीन का प्रयोग नशेबाज सर्वाधिक करते हैं। नाइट्राजीनपाम व बुप्रेनारफिन का भी खूब प्रयोग प्रयोग होता है। डा. गणेश के मुताबिक अधिकांश दवाओं में अफीम के अवयव मिले होते हैं, इसीलिए इनको खाने से नशा चढ़ता है। इनका प्रयोग अधिक समय तक करने से रोजाना खाने की आदत पड़ जाती है और खाने वाले की किडनी और लिवर खराब हो जाते हैं।

डा. गणेश के मुताबिक नारकोटिक्स दवाओं को मेडिकल स्टोर में बेचने के सख्त नियम हैं। ड्रग विभाग के एक विशेष साफ्टवेयर में मेडिकल स्टोर संचालक को मरीज का नाम, मोबाइल नंबर, पता और दवा लिखने वाले डाक्टर का नाम भरना होता है। एक-एक टेबलेट की गिनती होती है। अगर मेडिकल स्टोर संचालक ने बिना पर्चे दवाएं दी हैं तो वह निश्चित तौर पर पकड़ा जाएगा।

शहर में नारकोटिक्स की दवाओं से नशा करने वाले हजारों हैं। लाटूश रोड, गोविंद नगर कच्ची बस्ती, मेडिकल कालेज परिसर के आसपास का क्षेत्र, नौबस्ता, किदवई नगर, रेलवे स्टेशन व बस अड्डे पर ये आसानी से देखे जा सकते हैं।