पर्चा होने पर भी नाबालिगों को नारकोटिक्स से संबंधित दवाएं नहीं देने के स्पष्ट निर्देश

बरेली। नाबालिगों में बढ़ रही नशे की लत पर अंकुश लगाने के लिए ड्रग विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। सरकार की ओर से जारी निर्देश के तहत तनाव मुक्त की दवा एल्प्राजोलाम, नींद की दवा डाइजीपाम, दर्द निवारक के तौर पर इस्तेमाल की जाने वाले मॉर्फिन इंजेक्शन, पैथाडीन इंजेक्शन, ब्यूपी नार्फिन इंजेक्शन और ट्रामाडाल कैप्सूल समेत आदि दवाएं नाबालिग को नहीं बेची जा सकेंगी। भले ही इन दवाओं को इलाज के लिए मरीज को चिकित्सक ने पर्चा पर लिखकर दिया हो। दवा कारोबारियों को दवा का पर्चा लेकर पहुंचने वाले नाबालिगों को भी नारकोटिक्स से संबंधित दवाएं नहीं देने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

संदिग्ध स्थिति से निपटने के लिए दुकान में सीसीटीवी लगाने को कहा गया है। अगर विक्रेता निर्देश का उल्लंघन करते मिले तो नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी है। जिला अस्पताल मनकक्ष के मनोचिकित्सक डॉ. अशीष का कहना है कि लॉकडाउन के बाद नाबालिग में नशे की लत बढ़ी है। आंकड़ों मेें लॉकडाउन से पहले प्रतिमाह 10 से 15 मामले आते थे। जो अब प्रतिमाह 50 से ज्यादा पहुंच चुकी है। चिकित्सक के मुताबिक नशीली दवा के सेवन से बाहर से उसे पकड़ना कठिन होता है। इसलिए नाबालिग दवा के लती बनते हैं।

युवाओं में नशे की लत दूर करने के लिए सरकार की ओर से नशा मुक्ति अभियान चलाए जा रहे हैं। शोध के अनुसार नाबालिग उम्र में ही बच्चे नशे की चपेट में आ जाते हैं। लिहाजा, इसे बाद में काबू करना बेहद कठिन हो जाता है। तमाम शोध से प्राप्त सुझाव और मनोवैज्ञानिकों से विचार विमर्श के बाद केंद्र सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी हुई है। इसके तहत पांच से ज्यादा और 18 साल से कम उम्र के बच्चों या किशोर को मरीजों के लिए चिकित्सक द्वारा लिखी गई नारकोटिक्स कैटगरी की दवा बेचने पर अंकुश लगा दिया है। पर्चा होने पर भी दवा विक्रेता दवा नहीं दे सकेंगे।

नए नियमों की जानकारी देने के लिए ड्रग इंस्पेक्टर बबिता रानी ने केमिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्हें नए नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया। केमिस्ट एसोसिएशन ने इस पर सहमति जताई। इस दौरान डीबीसीए के अध्यक्ष दुर्गेश खटवानी समेत चंद्र भूषण, किशोर, राकेश, सतीष सेठी, महेंद्र कुमार, सुधीर, विजय, मुनीष, मोहित, रवि गुप्ता और दीपक मौजूद रहे।

दवा कारोबारियों ने ड्रग इंस्पेक्टर से सवाल किए कि अगर किसी परिवार से एक नाबालिग दवा लेने आता है और मना करने पर वह परिवार में अन्य किसी बड़े व्यक्ति के होने से मना करता है तो दवा देनी है कि नहीं। विषम परिस्थिति से निपटने के लिए ड्रग इंस्पेक्टर ने नाबालिग से अभिभावक का नंबर लेकर क ॉल कर नाबालिग का सत्यापन करने के बाद दवा विक्रय करने को कहा है।

ड्रग इंस्पेक्टर बबिता रानी ने जिले भर के सभी मेडिकल स्टोरों में सीसीटीवी लगाने और रिकॉर्डिंग 30 दिन तक सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। आशंका जताई है कि निर्देश के बावजूद कई दवा के थोक और रिटेल कारोबारी नाबालिग को दवा बेच सकते हैं। ऐसे में सीसीटीवी लगाना अनिवार्य है। ताकि औचक निरीक्षण में करीब तीस दिन की रिकॉर्डिंग की जांच की जा सके।