महिला डॉक्टर ने बनाई कैंसर की दवा, अमेरिका की लेबोरेट्री में बनी साइंटिस्ट

मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में रहने वाली एक किसान की बेटी का चयन अमेरिका की एक लेबोरेट्री में साइंटिस्ट के पद पर हुआ है। इसे लेकर इलाके में खुशी का माहौल है। मिर्जापुर की इस बिटिया ने कैंसर जैसी घातक बीमारी के दवा निर्माण संबंधी विषय पर रिसर्च किया है और एक ऐसा नैनो पार्टिकल बनाने का दावा है जिससे कैंसर के इलाज में होने वाली कीमोथेरेपी का मानव शरीर पर कम प्रभाव होगा।

जानकारी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाच्युसेट्स से एक सप्ताह पहले अपना शोध पूरा करने वाली खुशबू सिंह ने अप्लाइड लाइफ साइंसेज के लिए एक नैनोपार्टिकल का निर्माण किया है जो कैंसर समेत अन्य बीमारी के उपचार में एक नई क्रांति ला सकती है। यह शोध, कैंसर से प्रभावित होने वाली कोशिकाओं को अधिक सटीक और प्रभावी ढंग से उपचार प्रदान करने के लिए दो अलग-अलग समूह को जोड़ता है।

बायोलॉजिक्स या एंटीबॉडी-दवा संयुग्म (एडीसी) के जरिए से कैंसर से लड़ने वाली दवाओं का निर्माण एवं वितरण शामिल है। खुशबू ने अगस्त में अपना शोध कार्य पूरा कर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। रिसर्च के दौरान उसे 2 करोड़ 25 लाख रुपये का स्कॉलरशिप भी मिला। रिसर्च पूरा करने के बाद वह वेर्टेक्स लैबोटरी सेंटियागो अमेरिका में साइंटिस्ट पद पर कार्य कर रहीं है। डॉ. खुशबू ने अपनी उच्च शिक्षा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेश ऐंड रिसर्च से पूरी की है। जहां से 5 वर्षीय बीएसएमएस की डिग्री प्राप्त की है।

इसी दौरान उसे भारत सरकार के डिपार्टमेंट साइंस ऐंड टेक्नॉलजी की ओर से 5 हजार रुपए प्रति माह की स्कॉलरशिप भी मिल रही थी। साल 2016 में खुशबू का रिसर्च के लिए चयन विश्व की जानी-मानी यूनिवर्सिटी ऑफ ‘मेसाचुसेट्स अमेरिका में हुआ था। मिर्जापुर के चुनार तहसील के श्रुतिहार गांव के रहने वाले विनोद सिंह की बेटी का अमेरिका की एक लेबोरेट्री में साइंटिस्ट के पद पर चयन हुआ था। यहां पर उसने कैंसर के इलाज के लिए की जाने वाली कीमोथेरेपी पर एक रिसर्च किया। खुशबू का कहना है कि इससे परंपरागत कीमोथेरेपी की अपेक्षा कम नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।