सरकारी अस्पतालों में 40 प्रतिशत डॉक्टरों की कमी

रीवा, मध्य प्रदेश
सरकार और शासन स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और गुणवत्ता के दावे करता नहीं थकता, लेकिन धरातल पर यह हकीकत बेमानी लगती है।  यहां रीवा और शहडोल संभाग के सात जिले 40 प्रतिशत डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। यहां बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की परिकल्पना किसी हालत में नहीं की जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग के संभागीय कार्यालय में मौजूद जानकारी के मुताबिक रीवा और शहडोल संभाग के सात जिलों में डॉक्टरों के कुल 556 पद स्वीकृत हैं जिसके सापेक्ष 290 डॉक्टर ही पदस्थ हैं। 266 पद लम्बे समय से रिक्त बने हुए हैं। हालात ये हैं कि सभी जिलों में दर्जनों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सविहीन संचालित किए जा रहे हैं। जिसके चलते ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं बदतर हो गई हैं। मरीजों को इलाज के लिए मुख्यालय के अस्पतालों में शरण ले रहे हैं या फिर जबलपुर, इलाहाबाद और बनारस जाने को मजबूर हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने डॉक्टरों के पैकेज में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया, लेकिन फिर भी अपेक्षानुरुप नतीजे सामने नहीं आए।  सबसे ज्यादा डॉक्टरों की कमी सीधी और सतना के लोगों को खल रही है। दोनों ही जिले बीमारियों के मामले में स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता पर हैं। गौर करने वाली बात ये है कि इन जिलों में डॉक्टरों को सेवाओं के लिए अन्य जिलों की अपेक्षा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से अधिक वेतन का प्रावधान रखा गया है। फिर भी समस्या में सुधार नहीं।