अब सरकार की नियमित ड्रग टेस्टिंग और मॉडर्न लैब योजना

नई दिल्ली

देश के 2 लाख करोड़ की फार्मा इंडस्ट्री को रेगुलेट करने के लिए सरकार ने नियमित तौर पर ड्रग टेस्टिंग की योजना बनाई है। इसके लिए सभी राज्यों में मॉडर्न लैब बनाई जाएंगी। जांच और समीक्ष के लिए स्पेशल टीम बनेगी। दवा बनाने वाली कंपनियां अब क्वालिटी के मामले में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरत पाएंगी। दवाइयों में अगर किसी तरह की कमी पाई गई तो कंपनियों को भारी जुर्माना देना पड़ सकता है।  यहां तक कि लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इसके लिए हर स्टेट में दवाइयों की जांच के लिए आधुनिक तकनीक वाले लैबोरेटरी बनाई जाएंगी। पहले से मौजूद टेस्टिंग लैब में सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। लैब के लिए ट्रेंड मैनपावर का इंतजाम किया जाएगा। सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन कभी भी राज्यों में ड्रग मैन्यूफैक्वचरिंग साइट से सैंपल उठाकर उनकी जांच इन लैब में करवा सकती है। अगर जांच में कुछ भी गलत पाया गया तो इसकी जिम्मेदारी ड्रग कंपनी कीकी होगी।
पिछले दिनों एफ.डी.सी. ड्रग या कुछ अन्य दवाइयों की क्वालिटी खराब पाए जाने के बाद इस ओर खास तौर से ध्यान दिया जा रहा है। फंडिंग के लिए 75 रू 25 और 90 रू 10 का फॉर्मूला राज्यों में लैबोरेटरी बनाने और उनमें मैनपावर के लिए केंद्र सरकार की ओर से 75 फीसदी फंडिंग की जाएगी और 25 फीसदी हिस्सा राज्यों का होगा। हालांकि नॉर्थ ईस्टर जम्मू एंड कश्मीर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के लिए यह अनुपात 90 रू 10 का होगा। इसके लिए राज्य सरकारों से बात चल रही है।
दवा की गुणवत्ता के लिए स्टेट ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम में होने वाले हर सुधार पर भी नजर रखी जाएगी। पूरी योजना की ऑडिट ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया द्वारा किया जाएगा। ओवरआल मॉनिटरिंग हेल्थ मिनिस्ट्री द्वारा होगी।
अधिकारी ने बताया कि देश में मिलने वाली दवा की क्वालिटी में कमी हो तो इससे पब्लिक हेल्थ प्रभावित होती है साथ ही देश की छवि भी खराब होती है। इसका सीधा असर ड्रग इंडस्ट्री पर पड़ता है। इसलिए ऐसा नेटवर्क तैयार किया जा रहा है जिससे यहां केवल सेफ ड्रग की उपलब्धता ही हो।