रोहतक पीजीआई में एचआईवी, एड्स रोगियों के वायरस लोड की जांच शुरू, प्रदेश में रजिस्टर्ड हैं 35 हजार मरीज

रोहतक पीजीआई में आने वाले एचआईवी/एड्स के रोगियों के लिए बहुत बड़ी राहत भरी खबर है। अब बीमारी की मात्रा के हिसाब से दवाई देकर उन्हें राहत पहुंचाई जाएगी। इसके लिए पीजीआइ में एचआईवी की वायरल लोड जांच माइक्रोबायोलोजी विभागाध्यक्ष डा. अर्पणा के प्रयासों से शुरू हो गई है। प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान पीजीआईएमएस को माइक्रोबायोलॉजी मशीन मिल गई है।

रोहतक। रोहतक पीजीआई में आने वाले एचआईवी/एड्स के रोगियों के लिए बहुत बड़ी राहत भरी खबर है। अब बीमारी की मात्रा के हिसाब से दवाई देकर उन्हें राहत पहुंचाई जाएगी। इसके लिए पीजीआइ में एचआईवी की वायरल लोड जांच माइक्रोबायोलोजी विभागाध्यक्ष डा. अर्पणा के प्रयासों से शुरू हो गई है। प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान पीजीआईएमएस को माइक्रोबायोलॉजी मशीन मिल गई है। यह प्रदेश का पहला मेडिकल संस्थान है, जिसे यह मशीन मिली है। इस मशीन के मिलने से एड्स रोगियों को काफी सहूलियत होगी। अब मरीजों की बीमारी की मात्रा के हिसाब से मरीजों को दवाई देकर उन्हें राहत पहुंचाई जाएगी।

मशीन की इंचार्ज डॉ. रितू अग्रवाल का कहना किइस समय प्रदेश में करीब 35000 एचआईवी/एड्स के मरीज रजिस्टर्ड हैं। ऐसे में समय-समय पर मरीजों की जांच करनी होती है ताकि मरीज के अंदर बीमारी के फैलाव को देखते हुए उसके हिसाब से दवाई दी जा सके। पहले मरीजों की जांच मैट्रोपोलिस लैब द्वारा होती थी। पीजीआईएमएस के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में मशीन पहुचने के बाद इसे मरीजों के हितों को देखते हुए सैंपल्स की जांच शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि यह पहली मशीन पूरे प्रदेश में पीजीआईएमएस को ही मिली है।

डॉ. रितू ने बताया कि एचआईवी की दवाइयां देने की तीन ट्रीटमेंट लाइन होती है और मरीज को पहली लाइन से फर्क ना आने पर यह जांच करवाकर ही दूसरी लाइन पर डाला जाता है। उन्होंने कहा कि यदि बिना टेस्ट के मरीज की दवाइयों की कैटेगरी बदल दी जाती है तो उससे मरीज पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और उसको दवाइयों से लाभ होना तो दूर, बल्कि दुष्प्रभाव पड़ता है। अब इस मशीन के पीजीआईएमएस में उपलब्ध हो जाने से सभी मरीजों का यह टेस्ट निःशुल्क होगा और समय पर हो पाएगा।

उन्होंने कहा कि अभी सबसे पहले पीजीआईएमएस में रजिस्टर्ड करीब 3 हजार मरीजों का यह टेस्ट किया जाएगा। फिर धीरे-धीरे पूरे प्रदेश के मरीजों का टेस्ट यहां होगा। पीजीआई में रोजाना 300 से 400 एड्स मरीज दवाई, टेस्ट आदि के लिए आते है। डॉ. रितू ने कहा कि वे कुलपति डॉ. जी अनुपमा, कुलसचिव डॉ. एचके अग्रवाल, निदेशक डॉ. रोहताश यादव, विभागाध्यक्ष डॉ. अर्पणा, डॉ. वीणा सिंह डीजीएचएस, हरियाणा स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी पंचकूला से डॉ. रेनू के प्रयासों से यह मशीन पूरे प्रदेश में सबसे पहले पीजीआईएमएस में आई है।

इस अवसर पर डॉ. अर्पणा, नोडल अधिकारी एआरटी सेंटर डॉ. वीके कत्याल, डॉ. दीपक जैन, डॉ. किरण, डॉ. रमा, डॉ. मधू शर्मा, डॉ. निधि गोयल, डॉ. पीएस गिल, डॉ. अंतरीक्ष दीप, डॉॅ.पारूल, परमहंस, रितू शर्मा व अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।