दर्द का ये इंजेक्शन कर रहा मदहोश, दवा कारोबारियों की हरकत से उड़े अधिकारियों के होश

जबलपुर। दवा कारोबारी लगातार नशीली दवा बेच रहें है। बता दें कि अबकी बार दवा कारोबारियों की हरकत देखकर अधिकारियों के ही होश उड़ गए।
कोडीन फास्फेट मिश्रित समेत अन्य प्रचलित दवाओं के क्रय-विक्रय पर सख्ती के बाद नशे का ट्रेंड बदलने लगा है। शहर में नशेडि़यों को मार्फिन का इंजेक्शन बेचा जा रहा है। शातिर दवा कारोबारी इंजेक्शन के रैपर से बैच नंबर समेत अन्य घोषणाओं को मिटा देते हैं। औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मार्फिन के कुछ ऐसे इंजेक्शन नशेडि़यों से जब्त किए गए हैं, जिनके रैपर पर अंकित घोषणाएं मिटाई जा चुकी हैं। अधिकारियों ने बताया कि मार्फिन इंजेक्शन का नशे के तौर पर इस्तेमाल चिंता का विषय है।

ये इंजेक्शन नर्वस सिस्टम को प्रभावित करते हैं। इंजेक्शन के ओवर डोज से मौत हो सकती है। दरअसल कोडीन फास्फेट मिश्रित सीरप के अवैध कारोबार में औषधि प्रशासन विभाग ने दो प्रतिष्ठानों पर निशाना साधा है। औषधि निरीक्षक शरद कुमार जैन ने बताया कि डीके इंटरप्राइजेज नेपियर टाउन तथा नंदा एसोसिएट्स ब्यौहारबाग का औचक निरीक्षण किया गया था। शिकायत मिली थी कि दोनों प्रतिष्ठानों में कोडीन फास्फेट मिश्रित सीरप समेत नशे के तौर पर उपयोग होने वाले इंजेक्शन का अवैध कारोबार किया जा रहा है। प्रथमद्ष्ट्या दोनों प्रतिष्ठानों में गड़बड़ी पाई गई है। संचालकों को दवाओं के क्रय-विक्रय संबंधी दस्तावेज पेश करने के लिए पांच दिन का समय दिया गया है।

दस्तावेजों में गड़बड़ी पाए जाने पर लाइसेंस निलंबित किया जाएगा। बता दें कि दवा कारोबारी अब अफीम से बनाई जाने वाली दर्द निवारक मार्फिन के इंजेक्शन बेचकर नशेडि़यों के नशे की तलब को दूर कर रहे हैं। महानगरों से होता हुआ नशे का यह ट्रेंड जबलपुर तक पहुंच गया है। जिसकी सुगबुगाहट मिलते ही औषधि प्रशासन विभाग ने न सिर्फ दवा कारोबारियों बल्कि चंडीगढ़ व हरियाणा में संचालित दवा फैक्ट्रियों की भी टोल लेना शुरू कर दी है। सीरप, इंजेक्शन, टैबलेट का नशे के तौर पर इस्तेमाल की तमाम घटनाएं सामने आ चुकी है। दवा कारोबारियों व नशे की दवाएं बेचने वाले तस्करों की धरपकड़ के लिए पुलिस अभियान चलाकर कार्रवाई कर रही है। वर्ष 2020 तथा इस वर्ष सितंबर माह तक दर्जनों तस्करों को पकड़ा जा चुका है।

जिनसे बड़ी मात्रा में नशे के तौर पर उपयोगी दवाएं जब्त की गईं। अफीम से बनाई जाने वाली दर्द निवारक दवा काे नशे के तौर पर इस्तेमाल किए जाने का पता चला है। दवा कारोबारी मार्फिन इंजेक्शन के रैपर से बैच नंबर समेत तमाम घोषणाएं मिटाकर नशेडि़यों को बेच रहे हैं। कुछ ऐसे इंजेक्शन विभाग के हाथ लगे हैं जिनकी घोषणा मिटाकर नशेडि़यों को बेचे गए थे। जब्त इंजेक्शन के आधार पर दवा विक्रेताओं व निर्माता कंपनियों का पता लगाया जा रहा है। आवश्यक होने पर हरियाणा व चंडीगढ़ की दवा निर्माता कंपनियों को भी राडार पर लिया जाएगा।

नशे के रूप में उपयोगी दवाओं की खरीद फरोख्त पर पुलिस ने भी नजरें टेढ़ी की हैं। वर्ष 2020 से सितंबर 2021 तक जबलपुर पुलिस नशे की दवाएं बेचने वालों पर 31 प्रकरण दर्ज कर चुकी है। जिसमें 44 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। कार्रवाई के दौरान पुलिस 2 हजार 77 इंजेक्शन, 23 हजार 398 सीरिंज व निडिल, 2 हजार 685 नग कफ सीरप जब्त कर चुकी है। इतना ही नहीं 11 हजार 568 टैबलेट भी जब्त किए गए, जिनका उपयोग नशे की तलब को दूर करने के लिए किया जाता है।