क्या कब्ज की ये दवा बढ़ा सकती है याददाश्त? शोध से मिला ये संकेत

छोटे पैमाने पर किए गए मानव परीक्षण से पता चला है कि मानसिक बीमारी से पीड़ित मरीजों की बोध समस्याओं को सुधारने में कब्ज का इलाज करने वाली दवा मदद कर सकती है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की अगुवाई में किए गए परीक्षण से साबित हुआ कि प्रुकालोप्राइड और स्पष्टता से सोचने की हमारी क्षमता को भी बढ़ा सकती है।

नई दिल्ली। छोटे पैमाने पर किए गए मानव परीक्षण से पता चला है कि मानसिक बीमारी से पीड़ित मरीजों की बोध समस्याओं को सुधारने में कब्ज का इलाज करने वाली दवा मदद कर सकती है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की अगुवाई में किए गए परीक्षण से साबित हुआ कि प्रुकालोप्राइड और स्पष्टता से सोचने की हमारी क्षमता को भी बढ़ा सकती है। प्रुकालोप्राइड मुख्य रूप से पाचन की समस्याओं का इलाज करती है लेकिन ये दवा आपकी याददाश्त को बढ़ाने में भी मदद कर सकती है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि दवा से स्पष्ट मानसिक सुधार हैरान करने वाला था। प्रुकालोप्राइड को डॉक्टर की निगरानी में लेने पर महत्वपूर्ण साइड इफेक्ट्स नहीं होता है। ये आगे की जांच पड़ताल का शुरुआती बिंदु है। शोधकर्ता ये समझने के लिए और रिसर्च करते हैं कि क्या हेल्दी वॉलेंटियर में नतीजों को दोहराया जा सकता है और क्या उसका क्लीनिकल महत्व हो सकता है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के डॉक्टर सुशाना मर्फी ने प्रेस रिलीज में बताया, “हमारी रिसर्च नए दृष्टिकोण का इंसानों में शानदार शुरुआती सबूत मुहैया कराती है। ये शेष मानसिक लक्षणों में इलाज करने का एक सहायक तरीका हो सकता है।” शोधकर्ताओं का कहना है समझना जरूरी होगा कि क्या प्रुकालोप्राइड मौजूद अवसाद रोधी इलाज के प्रभाव में इजाफा करती है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि ये मनोवैज्ञानिक विकार जैसे डिप्रेशन, सिजोफ्रेनिया, मानसिक हानि, बाइपोलर डिसऑर्डर के कारण मानसिक हानि का मुकाबला भी कर सकती है। हालिया परीक्षण में 18-38 वर्षीय 44 वॉलेंटियर ने या तो प्रुकालोप्राइड या प्लेसेबो लिया. गोली लेने के 6 दिनों बाद शोधकर्ताओं ने ग्रुप को जानवरों की शृखंला दिखाई। एमआरआई स्कैन के बाद वॉलेंटियर को याददाश्त की जांच से गुजारा गया। याददाश्त की जांच में प्रुकालोप्राइड लेने वाले 22 वॉलेंटियर स्पष्ट रूप से बेहतर थे। छह दिनों तक प्रुकालोप्राइड लेने वाले प्रतिभागियों ने याददाश्त की जांच में प्लेसेबो हासिल करने वालों के मुकाबले ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया। प्रुकालोप्राइड ग्रुप में शामिल प्रतिभागियों ने पहले देखी तस्वीर को 81 फीसद पहचान की जबकि प्लेसेबो ग्रुप ने 76 फीसद. सांख्यिकी टेस्ट में संकेत मिला कि ये काफी बड़ा प्रभाव था।