मेरोपेनम घोटाला – करोड़ों के खेल में नप सकते हैं बड़े डॉक्टर

भोपाल (मध्य प्रदेश)
मेरोपेनम घोटाले की चपेट में प्रदेश के कई बड़े डॉक्टर आ सकते हैं। कैग रिपोर्ट में मेरोपेनम खरीद में घोटाले के खुलासे और जीआरएमसी डीन एसएन अयंगर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग के संचालक डॉ. जीएस पटेल ने सभी मेडिकल कॉलेजों से मेरोपेनम खरीद का रिकॉर्ड लिया है। पटेल भी मुख्यालय की जांच में दोषी बताए जा चुके हैं।
कैग की 2014-15 की रिपोर्ट में संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक द्वारा मेरोपेनम घोटाले का खुलासा किया गया था। इसमें फर्म को 1.15 करोड़ का भुगतान होना बताया गया। संचालनालय चिकित्सा शिक्षा द्वारा इस प्रकरण की जांच कराई गई थी, जिसमें तत्कालीन अधीक्षक एसएन अयंगर को दोषी पाया गया था। प्रदेश में 2009 से 2013 के बीच मेडिकल कॉलेजों द्वारा मेरोपेनम की करोड़ों रुपए की खरीदी की गई थी। एंटी बायोटिक मेरोपेनम इंजेक्शन सीपीसी (सेंट्रल पर्चेज कमेटी) के जरिए अस्पताल प्रशासन खरीदता था। सीपीसी ने इंजेक्शन मेरोपेनम की कीमत 385 रुपए प्रति नग तय की थी। यह इंजेक्शन डीजे कंपनी बनाती है। किंतु कंपनी ने अपने इंजेक्शन सप्लाई न करते हुए काबरा, जेक्सन, मेरोवेंट एवं ओआरपीएल कंपनी के इंजेक्शन सप्लाई कर दिए। इनकी कीमत मात्र 184 रुपए थी। जेएएच के तत्कालीन संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक द्वारा मार्च 2013 से जून 2014 की अवधि में इंजेक्शन मेरोपेनम की खरीदी टेंडर के जरिए की गई। मेरोपेनम इंजेक्शन की एक वायल की कीमत 211.90 रुपए थी, लेकिन डॉ. अयंगर ने इसे अधिकतम दर 385 रुपए में खरीदा। जिससे 1.15 करोड़ की हानि हुई। डॉ. अयंगर के साथ इसमें तत्कालीन प्रशासकीय अधिकारी एसआर मौर्य, लेखापाल रवींद्र सिंह तोमर और क्रय शाखा क्लर्क अतुल दुबे की भी लिप्तता बताई गई।
लोकायुक्त द्वारा डॉ. अयंगर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा है। डॉ. अयंगर के खिलाफ अब विभागीय जांच होगी। हालांकि राज्य की जांच में तत्कालीन अधीक्षक डॉ. एसएन अयंगर, प्रशासकीय अधिकारी (वित्त) एसआर मौर्य, भंडार अधिकारी डॉ. योगेंद्र प्रधान, भंडार लिपिक आनंद सिंह भदौरिया, क्रय लिपिक शिल्पा चोंच, सहायक क्रय लिपिक राजेंद्र श्रीवास्तव, लेखापाल रविंद्र सिंह तोमर को दोषी माना था। कैग रिपोर्ट में डॉ. अयंगर को दोषी माना गया है। ऐसी स्थिति में विभागीय जांच पर संदेह हो रहा है।