आयकर विभाग ने हेटरो फार्मास्यूटिकल ग्रुप पर मारा छापा, 142 करोड़ रुपये कैश और 550 करोड़ की मिली अघोषित संपत्ति

हैदराबाद स्थित हेटरो फार्मास्यूटिकल ग्रुप पर आयकर विभाग ने छापेमारी की। इस छापेमारी में 550 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति का पता चला है। हैरानी वाली बात यह है कि छापेमारी के बाद विभाग को 142 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश बरामद हुआ है। इतनी बड़ी तादाद में कैश मिलने पर आयकर विभाग के अफसर भी दंग रह गए।

हैदराबाद। हैदराबाद स्थित हेटरो फार्मास्यूटिकल ग्रुप पर आयकर विभाग ने छापेमारी की। इस छापेमारी में 550 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति का पता चला है। हैरानी वाली बात यह है कि छापेमारी के बाद विभाग को 142 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश बरामद हुआ है। इतनी बड़ी तादाद में कैश मिलने पर आयकर विभाग के अफसर भी दंग रह गए। बता दें कि हेटरो ग्रुप COVID-19 के इलाज के लिए रेमेडिसविर और फेविपिरवीर जैसी विभिन्न दवाओं को लेकर भी सुर्खियों में आया।

इसकी भारत, चीन, रूस, मिस्र, मैक्सिको और ईरान में 25 से अधिक जगहों पर उत्‍पादन फैसिलिटी हैं। कंपनी ने पिछले महीने कहा था कि उसे अस्पताल में भर्ती वयस्कों में COVID-19 के इलाज के लिए Tocilizumab के बायोसिमिलर वर्जन के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिल गई है। गौरतलब है कि 7,500 करोड़ रुपये वाली ये फार्मा कंपनी उन फर्मों में से एक है, जिसने भारत में COVID-19 वैक्सीन Sputnik V के निर्माण के लिए रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष के साथ करार किया है।

इसी बीच सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें एक खुली अलमारी में नोटों की गड्डियां भरी हुई दिखाई दे रही हैं। नोटों की इन गड्डियों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये रकम कितनी बड़ी होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस छापेमारी में 550 करोड़ रुपये की बेहिसाबी आय का पता चला। हैरानी की बात ये रही कि 142 करोड़ रुपये का तो सिर्फ कैश मिला।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर में अलमारियों में भारी मात्रा में कैश भरा हुआ दिखाई दे रहा है। हाल ही में हेटरो फार्मास्यूटिकल ग्रुप पर आयकर विभाग ने 6 राज्यों में करीब 50 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया था। CBDT ने कहा कि हेटरो ग्रुप फार्मास्यूटिकल उत्पादों के प्रोडक्शन, फॉर्मूलेशन के निर्माण आदि के कारोबार में लगा हुआ है। इसके अधिकांश उत्पादों को अमेरिका और दुबई जैसे देशों और कुछ अफ्रीकी और यूरोपीय देशों को निर्यात किया जाता है।