हरियाणा में नागरिक अस्पताल के 6 डॉक्टरों के खिलाफ FIR, जानें क्या है पूरा मामला

हरियाणा के सोनीपत जिले के नागरिक अस्पताल के 6 डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज हुई है। नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों पर आरोप है कि उन्होंने एक मेडिकल रिपोर्ट में गड़बड़ी की है। हत्या के मामले में डॉक्टरों द्वारा जब मेडिकल करवाया गया तो पहले एक चोट दिखाई गई और फिर जब बोर्ड ने जांच की तो चार चोटें दिखाई गई।

सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत जिले के नागरिक अस्पताल के 6 डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज हुई है। नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों पर आरोप है कि उन्होंने एक मेडिकल रिपोर्ट में गड़बड़ी की है। हत्या के मामले में डॉक्टरों द्वारा जब मेडिकल करवाया गया तो पहले एक चोट दिखाई गई और फिर जब बोर्ड ने जांच की तो चार चोटें दिखाई गई। शिकायत के बाद पुलिस ने सभी डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार सोनीपत पुलिस ने झगड़े में घायल युवक की MLR को लेकर 4 साल से चल रहे विवाद में गजब की एंट्री मारी है।

इस केस में शिकायत महिला डॉक्टर के खिलाफ थी और 5 डॉक्टरों के बोर्ड ने महिला डॉक्टर की गलती की पुष्टि भी कर दी। मगर बात जब पुलिस के पास पहुंची तो उसने FIR में अभियुक्त वाले कॉलम में आरोपी डॉक्टर राशि वालिया की जगह मेडिकल बोर्ड में शामिल रहे पांचों डॉक्टरों का नाम लिखकर उन पर ही केस बना डाला। अब इस गलती पर पर्दा डालने का प्रयास किया जा रहा है। उधर आरोपी पर कार्रवाई को लेकर मामला कोर्ट में भी चल रहा है। मामला यह था कि सोनीपत जिले के हरसाना कलां गांव में 29 दिसम्बर, 2017 को दो पक्षों में विवाद हो गया जिसमें रणधीर सिंह नामक शख्स की हत्या कर दी गई और मनोज गंभीर रूप से घायल हो गया।

मनोज को सोनीपत अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर राशि वालिया ने उसकी मेडिको लीगल रिपोर्ट (MLR) काटी। MLR में मनोज के शरीर पर जो चोटें दिखाई गईं, उससे मनोज का परिवार संतुष्ट नहीं हुआ। मनोज के भाई अशोक ने सोनीपत के तत्कालीन एएसपी को शिकायत देकर मेडिकल डॉक्टरों का बोर्ड बनाकर दोबारा मेडिकल कराने की अपील की। अशोक ने आरोप लगाया कि डॉक्टर राशि वालिया ने हमलावरों के साथ मिलकर उसके भाई की गलत मेडिकल रिपोर्ट बनाई है। बाद में 5 डॉक्टरों का बोर्ड बनाकर मेडिकल कराया गया तो डॉ. राशि वालिया की MLR गलत पाई गई।

मेडिकल बोर्ड ने नई MLR बनाई। डॉक्टर राशि वालिया ने मनोज की पहली MLR में उसके शरीर पर 3×0.5 CM घाव होना बताया मगर मेडिकल बोर्ड की जांच में घाव की लंबाई 10.5CM पाई गई। मेडिकल बोर्ड ने मनोज के शरीर पर चोटें भी Parietal Region पर पाई जबकि डॉ. राशि वालिया ने अपनी MLR में Occipital Region पर ये चोटें दिखाई थीं। डॉ. वालिया ने अपनी MLR में मनोज के शरीर पर 1 ही चोट दिखाई जबकि मेडिकल बोर्ड ने 4 चोट पाईं। MLR में की गई गड़बड़ी को लेकर अशोक चार साल से आरोपी डॉ. राशि वालिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए भटक रहा है।

उसने पुलिस अधिकारियों से लेकर स्वास्थ्य विभाग के हर बड़े अफसर को शिकायत दी मगर कार्रवाई नहीं हुई। इस पर अशोक ने सोनीपत कोर्ट में केस कर दिया जिसकी सुनवाई मंगलवार को हुई। इस सुनवाई के चंद घंटे बाद ही सोनीपत पुलिस ने सेक्टर-27 थाने में अशोक की शिकायत पर FIR तो दर्ज कर दी मगर इसमें डॉ. राशि वालिया की जगह मेडिकल बोर्ड में शामिल रहे पांच डॉक्टरों, डॉ. अम्भुज जैन, डॉ. एकता शर्मा, डॉ. सुशील जैन, डॉ. राहुल कम्बोज और डॉ. गौरव शर्मा को अभियुक्त बना दिया।19 अक्टूबर 2021, मंगलवार शाम को दर्ज 216 नंबर FIR में आधा दर्जन गम्भीर धाराओं में 5 डॉक्टरों को अभियुक्त बनाया गया।

इनमे डॉ. अम्भुज जैन, डॉ. एकता शर्मा, डॉ.सुशील जैन, डॉ. राहुल कम्बोज और डॉ. गौरव शर्मा है। हैरानी वाली बात है कि घायल मनोज के भाई अशोक की ओर से दी गई तहरीर में इन पांचों पर कोई आरोप नहीं है। अशोक ने जिस डॉक्टर राशि वालिया के खिलाफ शिकायत दी, अभियुक्तों में उसका नाम दर्ज नहीं किया गया। अशोक कुमार, जिसकी शिकायत पर FIR दर्ज की गई है, उसका कहना है कि उन्होंने तो शिकायत डॉ. राशि वालिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए दी थी। मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉक्टरों पर नहीं। उसे नहीं पता कि मेडिकल बोर्ड में शामिल 5 डॉक्टरों पर FIR दर्ज क्यों की गई?

अशोक ने यह भी बताया कि उसे अभी तक FIR की कॉपी नहीं मिली है। इस बीच सोनीपत के सेक्टर-27 थाने के इंचार्ज इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार ने कहा कि वह मंगलवार को छुट्‌टी पर थे। अब FIR देखेंगे। आरोपी उन्हें ही बनाया जाएगा जिनका उल्लेख शिकायत में है। हो सकता है कोई क्लेरिकल मिस्टेक हो गई हो। सोनपत एसपी जश्नदीप सिंह रंधावा ने कहा कि मामले को एडीए को सौंपा गया था, जिसमें बोर्ड द्वारा किए गए मेडिकल को गलत बताया गया। इसके बाद पांच डॉक्टरों पर केस दर्ज कर दिया है। अब इसकी जांच की जाएगी।

डॉक्टरों पर जो धाराएं लगाई गई हैं वो इस प्रकार हैं –

दफा-120 बी-आपराधिक साजिश रचना।
दफा-167- सरकारी कर्मचारी द्वारा गलत दस्तावेज बनाना।
दफा–193-किसी मामले में झूठा साक्ष्य देना या गढ़ना
दफा- 217-किसी को बचाने के लिए मामला रफा-दफा करने का प्रयास।
दफा-218- बतौर लोकसेवक किसी के खिलाफ गलत दस्तावेज बना।
दफा-34-आपराधिक कृत्य में शामिल होना।

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