डेंगू का डंक बढ़ा रहा मरीजों व तीमारदारों की आर्थिक परेशानी, निजी ब्लड बैंक से खरीद रहे प्लेटलेट्स

पानीपत। डेंगू का कहर लगातार जारी है। मरीजों की संख्या भी दिन प्रति दिन बढ़ती ही जा रहे है। जिसका सीधा असर मरीजों व तीमारदारों की आर्थिक हालातों पर होता हुआ नजर आ रहा है। एक तरफ डेंगू मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है तो दूसरी तरफ डेंगू मरीजों की प्लेटलेट्स लगातार कम होती जा रही है। इन मरीजों को अस्पताल में सुविधा नहीं होने के कारण प्लेटलेटस निजी ब्लड बैंकों से खरीदने पड़ रहे हैं। जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में स्थापित ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन ब्लड बैग न होने से धूल फांक रही है। अब ये भी जानना बेहद जरुरी है कि ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन का काम क्या होता है। आखिर ये इतनी क्यों जरुरी होती है। बता दें कि ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग अलग कर देती है।

थैलेसीमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत होती है। मशीन लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी), प्लेटलेट्स और प्लाज्मा, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा को अलग-अलग करती है। इन तत्वों को ब्लड सेपरेटर मशीन से अलग करने के बाद पूरी यूनिट खून चढ़ाने के बजाय इन तत्वों को चढ़ाया जाता है। ऐसे में इन मरीजों को सीधा लाभ पहुंचता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिला अस्पताल में पैथालॉजिस्ट और लैब टेक्नीशियन को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पीजीआई चंडीगढ़ में लगातार तीन दिन तक दिए जाने वाले इस प्रशिक्षण में मशीन के संचालन के बारे में बारीकियां समझाई जाएंगी। गौरतलब है कि डेंगू का डंक ने अब मरीजों व तीमारदारों की आर्थिक परेशानी भी बढ़ा दी है। 300 एमएल यानी 50 से 60 हजार प्लेटलेट्स खरीदने के लिए मरीजों को निजी ब्लड बैंक में 11 हजार रुपये देने पड़ रहे हैं।

पंचकूला और गुरुग्राम के बाद कुरुक्षेत्र के ब्लड बैंक में स्थापित ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन का लाइसेंस मिलने से जरूरतमंदों को सरकारी दरों पर प्लेटलेट्स मिलने की आस जगी थी, लेकिन ब्लड बैग न मिलने से इस मशीन को अब तक शुरू नहीं किया गया है। इसलिए हर रोज 5 से 7 मरीजों के परिजन प्लेटलेट्स के लिए निजी ब्लड बैंकों की ओर रुख कर रहे हैं। बता दें कि सरकार की ओर से वर्ष 2018 में जिला स्वास्थ्य विभाग को ब्लड कंपोनेंट मशीन मुहैया कराई गई थी, ताकि मरीजों को रक्त, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा उपलब्ध हो सके पर आधे-अधूरे उपकरण के चलते मशीन धूल फांक रही थी। उपकरण पूरे होने पर जिला स्वास्थ्य विभाग को 25 दिन पहले मशीन का लाइसेंस दिया गया था। जिला स्वास्थ्य विभाग के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. रमा का कहना है कि ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन के ब्लड बैग की डिमांड भेजी गई है। उम्मीद है कि आगामी एक-दो दिन तक ब्लड बैग उपलब्ध हो जाएंगे। इसके पश्चात हर जरूरतमंद मरीजों को रैंडम डोनर प्लेटलेट्स निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

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