रिटा. हुए डॉ. वीके जैन : ‘क्लीन स्किन’ वाले डॉक्टरों को संभालिए ‘सरकार’

रोहतक: स्वच्छ भारत की राह में अड़ंगा लगाने वाले सभी छोटे-बड़े व्यक्तियों को दंडित करने का दम भरने वाली वाली हरियाणा सरकार को शासन में स्वच्छ छवि के काबिल सेवकों को संभालने की ज्यादा दरकार है खासकर बात जब चिकित्सा क्षेत्र की हो। क्योंकि यहां तो सीधे तौर पर पूरा खेल ही ‘जिंदगी और मौत’ से जुड़ा होता है। बुरे काम के लिए अपनी ‘डिक्शनरी’ में माफी शब्द नहीं होने की बात कहने वाले स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को उन फाइलों पर चुस्ती और संभाल दिखानी चाहिए जिनमें बेदाग छवि के डॉक्टर अपने अच्छे कामों का हवाला देकर सेवा जारी रखने का मौका मांगते हैं। इससे न केवल मरीजों को स्वास्थ्य लाभ मिलेगा बल्कि स्वास्थ्य सिस्टम में स्वच्छता भी आएगी। वैसे राज्य काबिल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है।

दरअसल, पीजीआईएमएस रोहतक के चर्म रोग विभागाध्यक्ष एवं हेल्थ विश्वविद्यालय के प्रो. वाइस चांसलर डॉ. वीके जैन 47 साल की लंबी सेवा के बाद सेवानिवृत हो गए। बतौर उपकुलपति 24 अगस्त 2017 को उनका कार्यकाल पूरा हो गया। आगे सेवा जारी रखने के लिए उन्होंने करीब दो माह पहले संस्थान को एक्सटेंशन का निवेदन किया था लेकिन कार्यकाल बीतने के बाद भी कोई जवाब नहीं आया। बेशक डॉ. जैन ने संस्थान में आने वाले मरीजों को ‘खिली-खिली कोमल त्वचा’ प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन सरकार ने उनके चेहरे पर खुशी लौटाने में जरा-भी दिलचस्पी नहीं दिखाई। डॉ. जैन को एक्सटेंशन से ज्यादा मायूसी इस बात को लेकर भी है कि उन्हें पीजीआई कैंपस से बाहर रहना पड़ेगा। चूंकि कैंपस में चारों और डॉक्टर मित्रों का जमावड़ा है लिहाजा अपने पेशे के अनुरूप मिले वातावरण का छुट जाना सभी को अखरता है।

मूलरूप से भिवानी के बिचला बाजार के निवासी डॉ. वीके जैन ने 1970 में एमबीबीएस में दाखिला लिया, इसके बाद यहीं से एमडी करने के बाद संस्थान में अलग-अलग पदों पर कार्य किया। चाहे पीजीआई में चिकित्सक रहे हों या डीन या फिर प्रो.वीसी, सभी पदों पर उनका कार्यकाल निर्विवाद रहा। डॉॅ. जैन के मुताबिक, उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं है, शायद संस्थान और सरकार को उनकी जरूरत नहीं होगी। जिस कारण उनकी एक्सटेंशन फाइल को मंजूर नहीं किया गया। नियमानुसार अभी ढाई साल एक्सटेंशन मिल सकती है। सेवानिवृति के बावजूद डॉ. जैन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य रहेंगे। वह प्रेक्टिस जारी रखेंगे, सिर्फ जगह बदल जाएगी।

मेडीकेयर न्यूज ने इस बाबत जब कुलपति डॉ. ओपी कालरा से बात की तो उन्होंने सारा मैटर ऊपर वालों के हाथों में होने की बात कही। वह बोले कि स्वास्थ्य विभाग जो फैसला लेगा, नियमानुसार उसे लागू करने में वह जरा भी देरी नहीं करेंगे। डॉ. जैन के कार्यकाल को उन्होंने भी खुले मन से सराहा।