कंबिनेशन दवा के बाद हेल्थ सप्लीमेंट्स बैन करने पर विचार

नई दिल्ली

पॉपुलर एंटी-बायोटिक्स और कफ सिरप पर बैन लगाने से परेशान दवा कंपनियां पर एक और आफत टूटने वाली है। एक रेगुलेटरी नोटिस के चलते 20,000 करोड़ रुपये की न्यूट्रास्युटिकल इंडस्ट्री पर खतरा मंडरा रहा है। इस सेगमेंट में सन फार्मा, एबॉट न्यूट्रिशन और ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन जैसी दवा कंपनियां हैं। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने कंपनियों को 2011 के बाद लॉन्च हेल्थ सप्लीमेंट की मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग के लिए सख्त गाइडलाइंस मानने का आदेश दिया है। सन, एबॉट और ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन के अलावा एमवे न्यूट्रिशन, मैनकाइंड फार्मा और हर्बलाइफ भारत में हेल्थ सप्लीमेंट्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन करती हैं। एफएसएसएआई के एन्फोर्समेंट निदेशक राकेश चंद्र शर्मा की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया, ‘यह फैसला लिया गया है कि जब तक न्यूट्रास्युटिकल फूड सप्लीमेंट्स और हेल्थ सप्लीमेंट्स के स्टैंडड्र्स नोटिफाई नहीं किए जाते, तब तक ऐसे प्रॉडक्ट्स के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में जो बातें कही गई हैं, उनके आधार पर कार्रवाई हो सकती है।’

यह नोटिफिकेशन उन प्रॉडक्ट्स पर लागू नहीं होगा, जो 2011 में एफएसएसएआई एक्ट बनने से पहले से मिल रहे हैं या 19 अगस्त 2015 तक जिन प्रॉडक्ट्स का अप्रूवल पेंडिंग था। इसी तारीख को एफएसएसएआई की प्रॉडक्ट अप्रूवल एडवाइजरी कमेटी को सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के चलते भंग किया गया था। इंडस्ट्री को डर है कि इस नोटिफिकेशन के चलते 2011 के बाद लॉन्च सभी प्रॉडक्ट्स पर बैन लगाया जा सकता है। उत्पादक फार्मा कंपनियों ने इस नोटिस को बेहद सख्त बताया है।

बता दें कि इस तरह के प्रतिबंध की शुरुआत पटना फूड एंड ड्रग रेगुलेटर के 2014 में सभी हेल्थ सप्लीमेंट्स को बैन करने से हुई थी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट गया। वहीं, 2011 में एफएसएसएआई ने प्रॉडक्ट अप्रूवल कमेटी बनाई थी। इस कमेटी का काम उन मानकों के आधार पर न्यूट्रास्युटिकल प्रॉडक्ट्स को अप्रूव करना था, जिनके आधार पर दवाओं को मंजूरी दी जाती है। हालांकि, पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने इस कमेटी को अवैध ठहराया, जिसके बाद एफएसएसएआई को इसे भंग करना पड़ा। कंपनियों के अधिकारी एफएसएसएआई के नोटिफिकेशन को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ मान रहे हैं।