आयुष मंत्रालय की वेबसाइट(हिंदी) कर रही मायूस

-वेबसाइट पर अंग्रेजी में भपूर सामग्री है लेकिन हिंदी में लग रहा पलीता
-अंग्रेजी दवाओं पर कैंची से एलोपैथी को झटका, आयुर्वेद के प्रचार का भी बंटाधार कर रही केंद्र सरकार

नई दिल्ली: भारत को फिर से आयुर्वेद का जनक बनाने में जुटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब दिल्ली के राजपथ मैदान में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर स्वयं योगा करने पहुंचें, तो लगा भारत में अब आयुर्वेद के दिन बहुरेंगे। प्रधानमंत्री ने न केवल शारीरिक लोम-विलोम किया बल्कि कार्यक्षेत्र में भी उनकी कसरत का कोई सानी नहीं, लेकिन लगता है विभागों के मंत्री और अधिकारी उनके अंदाज से कदमताल नहीं मिला पा रहे है। खासकर हिंदी भाषा में तो कतई नहीं। आयुष मंत्रालय की वेबसाइट कुछ ऐसी ही कहानी कह रही है। जब मंत्रालय की वेबसाइट को खंगाला तो, उसमें अंग्रेजी सेक्शन में तो संबंधित कैटागरी में सामग्री ठीक-ठाक मिली, लेकिन हिंदी सेक्शन में नाम मात्र ही ध्यान दिया जा रहा है।

 

 

प्रधानमंत्री विदेशों में भी हिंदी में भाषण देकर मातृ भाषा की गरिमा बढ़ा रहे हैं, लेकिन आयुष विभाग की वेबसाइट का हिंदी सेक्शन देखकर मायूसी हाथ लगी। पिछले कई दिनों से अंग्रेजी दवाओं के कंबिनेशन पर सरकारी बैन से जब मेडीकेयर न्यूज सरकार के आयुर्वेदिक एजेंडे को देखने के उद्देश्य से आयुष मंत्रालय की वेबसाइट के www.indianmedicine.nic.in लिंक पर गया तो मुख्य पृष्ठ की आभा तो आयुर्वेदिक अहसास करा रही थी, लेकिन मुख्यपृष्ठ के बाई तरफ अंकित सूची मंत्रालय को पलीता लगा रही है। सूची में ‘चिकित्सा पद्धतियों के बारे में’ लाइन पर क्लिक करने पर योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, युनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और सोवा रिग्पा आदि के बारे में बताया गया है, लेकिन इन अलग पद्धतियों के भीतर खानापूर्ति की गई है। आयुर्वेद जहां 13 लाइनों में ही निपटाया गया है, तो होम्योपैथी, युनानी, सिद्ध, सोवा रिग्पा आदि पद्धति 4 से 5 लाइनों में दम तोड़ रही है। प्राकृतिक चिकित्सा भी मात्र ढ़ाई पेज में ही सिमट रही है। हां योगा में इतनी सामग्री जरूर है, जिस पर संतोष किया जा सके। भारत माता की जय को लेकर राजनीति, मीडिया और अन्य स्तर पर इन दिनों खूब जोर-आजमाइश हो रही है, लेकिन भारत के स्वास्थ्य और उसके मातृ भाषा में प्रचार की बेकद्री पर किसी का ध्यान नहीं।
कहावत याद आ गई ‘नाम बड़े और दर्शन छोटे’