पड़े पड़े एक्सपायर हो रही जेनेरिक दवाएं, जिम्मेदार कौन

मेडिकल स्टोर
नकली दवाओं का कारोबार

बाराबंकी। लोगों को सस्ती दवाएं देने के लिए पीएम ने जन औषधि केंद्र की स्थापना की थी. सोचिए अगर डॉक्टर ही जेनेरिक दवाएं न लिखे तो क्या मरीज खुद से दवा खरीदने में सक्षम होगा।

बता दें कि पिछले पांच सालों से जिला महिला अस्पताल, हिंद अस्पताल व लखपेड़ाबाग में एक निजी केंद्र के अलावा हैदरगढ़ में भी प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित हैं।

इन केंद्रों पर लोग उस तरह से दवा खरीदने नहीं पहुंचे, जिस तरह से मेडिकल स्टोर पर पहुंचते हैं। ऐसे में जन औषधि केंद्रों पर दवाएं रखे-रखे एक्सपायर हो रही हैं। औषधि केंद्र जिला महिला अस्पताल के अंदर संचालित होने के बाद भी यह हाल है।

प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के तहत 1400 से अधिक प्रकार की जेनरिक दवाएं उपलब्ध हैं। जेनरिक दवाएं ब्रांड वाली दवाओं से कई गुना सस्ती पड़ती है। जेनरिक दवा को सॉल्ट के नाम से बेचा जाता है।

इस मामले में बात करते हुए जिला महिला अस्पताल सीएमएस डॉ. पीके श्रीवास्तव ने कहा कि जिला महिला अस्पताल के अलावा जिला अस्पताल के डॉक्टरों को जेनरिक दवाएं ही लिखनी चाहिए। इसे लेकर महिला अस्पताल के डॉक्टरों को पत्र जारी किया जाएगा।

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