स्वास्थ्य कर्मचारी हड़ताल पर, झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी

मध्य प्रदेश – नसरुल्लागंज (भोपाल)
फर्जी और बंगाली डॉक्टरों का इन दिनों सीजन तेज है। नगर सहित गांव-गांव में इनके क्लीनिक खुलेआम संचालित हो रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर स्वास्थ्य विभाग भी मौन साधे हुए है। इस समय संपूर्ण प्रदेश के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल के चलते नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बदहाल पड़ी हैं। इसका सबसे ज्यादा फायदा झोलाछाप डॉक्टरों को मिल रहा हैं। हड़ताल की एवज में ये बेखौफ होकर भोले-भाले लोगों का उपचार गलत तरीके से कर रहे हैं। कई सालों से इनके खिलाफ स्वास्थ्य विभाग के अमले ने कोई कार्रवाई भी नहीं की है।

जानकारी के अनुसार नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 100 से अधिक फर्जी और बंगाली डॉक्टर हैं। अंतिम छोर के गांवों में भी इनकी दुकानें संचालित हो रही हैं। यहां बाकायदा एलोपैथी पद्धति से उपचार चल रहा है। कुछ जगह तो हाल यह है कि इनके क्लीनिकों में मरीजों को भर्ती कर बॉटल चढ़ाई जा रही है। कई बार इनके इलाज से मरीजों की जान पर
बन चुकी है। ऐसी स्थिति में ये फर्जी डॉक्टर अपने खर्च पर ऐसे मरीजों को महानगरों के बड़े अस्पतालों में भेजकर उपचार कराते हैं। ऐसे में मरीज और उनके परिवार वाले कोई शिकायत भी नहीं करते। दूसरी ओर जिले में करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और कर्मचारियों की लापरवाही भी फर्जी डॉक्टरों के फलने-फूलने का कारण है।

जानकारी के अनुसार नसरुल्लागंज विकासखंड में पिछले चार सालों से किसी भी डॉक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी खामोश बैठे हैं। बीते पांच साल पूर्व फर्जी डॉक्टर ने एक मरीज को गलत इंजेक्शन लगाने पर मरीज को गंभीर हालात में भोपाल रेफर किया गया था। परिजनों ने पुलिस ने डॉक्टर की रिपोर्ट भी की थी। इसका मामला न्यायालय में जाने पर डॉक्टर को जेल भेजा गया था। इसके बाद से लेकर आज तक स्वास्थ्य विभाग के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इन झोलाछाप डॉक्टरों पर कोई कार्रवाई नहीं की है। नगर ही क्या सीहोर जिले का ऐसा कोई विकासखंड नहीं है जहां पर बंगाली डॉक्टर न हो। आदिवासी अंचल में इनका चिकित्सकीय कारोबार स्वास्थ्य विभाग के ही अधिकारियों की मौजूदगी में जोर-शोर से चल रहा है। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि सरकारी अस्पतालों व उप स्वास्थ्य केंद्रों में वर्षों से पर्याप्त स्टाफ मौजूद नहीं होना, संसाधनों के अभाव व डॉक्टरों का समय पर स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद नहीं होना भी मरीजों को इनकी शरण में पहुंचने में मजबूर करता है।

जिला स्वास्थ्य अधिकारी  का कहना है कि शीघ्र ही एक विशेष टीम गठित कर इन डॉक्टरों की डिग्रियों की जांच की जाएगी। यदि कहीं पर कोई डॉक्टर फर्जी तरीके से मरीजों का उपचार करता है तो ग्रामीण इसकी शिकायत हमें करें। हम तत्काल कार्रवाई करेंगे।