सरकार लाचार और बच्चे बीमार

देहरादून में 50.3 प्रतिशत बच्चे एनिमिया ग्रस्त

उत्तराखंड (देहरादून)
उत्तरखंड इन दिनों राजनीतिक और स्वास्थ्य, दोनो ही क्षेत्रों में त्रासदी से गुजरा रहा है। एक ओर उत्तराखंड में  कुपोषित और कमजोर बच्चों को गोद लेने की घोषणा करने वाली सरकार बर्खास्त हो गई है तो दूसरी ओर जिले में 50.3 प्रतिशत बच्चे एनिमिया के शिकार हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से पहली बार जारी किए गए जिलावार डाटा में स्वास्थ्य से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। ग्रामीण इलाकों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा में आशा कार्यकर्ता सकारात्मक रोल अदा कर रही हैं तो दूसरी ओर शहरी इलाकों में सरकारी सिस्टम से लोगों का मोहभंग हो गया है। देहरादून जिले के स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे तथ्य पहली बार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किए हैं।
जिले में शहरी इलाकों की 43.6 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों की 51.2 प्रतिशत महिलाएं गर्भावस्था के दौरान चार बार स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराती हैं, गर्भावस्था के शुरुआती 100 दिनों में शहरी इलाकों की महज 26.1 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों की 32.9 प्रतिशत महिलाएं आयरन और फॉलिक एसिड की टेबलेट लेती हैं। सरकार की जननी सुरक्षा योजना के तहत बच्चे के जन्म पर मिलने वाली आर्थिक सहायता का लाभ शहरी क्षेत्रों में 46.8 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों की 53.9 प्रतिशत महिलाओं को मिल रहा है, सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने के मामले में शहरी क्षेत्रों की महिलाओं की संख्या 46.6 और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की संख्या 52.7 प्रतिशत है, शहरी इलाकों के 30.2 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों के 33.2 प्रतिशत लोगों ने हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का लाभ लिया हुआ है, शहरी क्षेत्रों में 1.4 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.4 प्रतिशत महिलाओं को घर पर ही प्रसव कराया जाता है, सर्वे में जिले में शहरी क्षेत्रों की 40.7 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों की 44.1 प्रतिशत महिलाएं एनिमिया की शिकार पाई गई।