महाराष्ट्र में शेड्यूल एच1 की कड़ाई, 987 बिन डीएल धरे

मुंबई/अंबाला

केंद्र सरकार द्वारा देशभर में शेड्यूल एच.1 को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। पूरे देश में कहीं भी शेड्यूल एच.1 के नियमों की पालना की जमीनी हकीकत जाने बगैर फरमान जारी किया कि रोगी का पूरा विवरण चिकित्सक नियत वर्षों तक संभाल कर रखें। औचक निरीक्षण के समय रिकॉर्ड प्रस्तुत न कर पाने की स्थिति में टाडा-पेटा जैसी सजाओं का प्रावधान घोषित किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर दवा विक्रेता संगठन ने हड़ताल के माध्यम से सरकार को चेताया कि इस कानून के आने से आमजन का इलाज से वंचित रह जाना निश्चित है। जिस पर सरकार ने मामले की बारीकी को समझते हुए एच.1 नियम को कड़ाई से मनवाने का मन बना लिया।

हाल ही में नागपुर, नासिक जोन 122 की 11220 दुकानों में से 987 ऐसी दुकानों को औषधि प्रशासन ने शेड्यूल एच.1 के माध्यम से विभाग की शर्तो पर कार्य न करने के कारण लाइसेंस ही नवीकरण नहीं किए। ऐसे में दवा विक्रेता तो अपने कागजों के आधार पर ठीक हैं, क्योंकि समय पर ड्रग्स लाइसेंस नवीकरण हेतु आवेदन कर दिया था। विभागीय अधिकारियों के पास समय के आभाव में यदि अभी तक नवीकरण करके ड्रग्स लाइसेंस दुकानदारों को नहीं दिए तो इसमें दवा विक्रेता दुकानदारों का क्या दोष ?

नागपुर के 4018 रिटेलरों में से 218 दवा विक्रेताओं के पूणे जोन के 2798 में से 252 के नासिक जोन एक में 2392 में से 281 के, नासिक जोन में दो में 2012 में से 236 दवा विके्रताओं के लाइसेंस नवीकरण नहीं किए। विभाग ने अब इन बिना लाइसेंस के दुकानदारों पर औषधि प्रशासन ने इन सभी को दुकानों को आगामी आदेशों तक दुकानों को न खोलने के आदेश जारी कर दिए। जिससे दवा विके्रताओं, संगठन के साथ-साथ समाज में मरीजों में दवाइयां न मिल पाने के कारण अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो चुका है। राज्य संगठन की ओर से सरकार और औषधि प्रशासन को गतिरोध समाप्त कर ड्रग्स लाइसेंस नवीकरण कर दुकानों को खुलवाने के प्रयास जारी हैं।