रोहतक में फर्जी सर्टिफिकेट पर चलाया जा रहा था ब्लड सेंटर, एफडीए ने किया भंडाफोड़, डॉक्टर पर एफआईआर दर्ज

रोहतक। रोहतक दिल्ली बायपास पर स्थित नोबल ब्लड सेंटर को फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर चलाये जाने का भंडाफोड़ हुआ है। मामला सामने आते ही एफडीए ने सेंटर को सील करते हुए डॉ दीपक पर एफआईआर दर्ज करवा दी है।

इस संबध में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि नोबल ब्लड सैंटर दिल्ली बायपास रोहतक ने अपने ब्लड सेंटर के मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज होशियार सिंह के त्यागपत्र देने पर उन की जगह डॉ दीपक कुमार को मेडिकल ऑफिसर नियुक्त किया था। इससे संबंधित जानकारी स्टेट ड्रग कंट्रोलर हरियाणा पंचकूला को दी थी। साथ ही डॉ  दीपक के शपथ पत्र के साथ अनुभव प्रमाण पत्र भी उनके कार्यालय के जमा करवाया गया। इस अनुभव प्रमाण पत्र  के अनुसार गाजियाबाद यूपी में स्थित ली क्रेस्ट ब्लड सेंटर में डॉ दीपक को वहां दिनांक 30.10.2020 से 15.02.2022 तक कार्यरत दर्शाया गया था।

उपरोक्त अनुभव प्रमाण पत्र को स्टेट ड्रग कंट्रोलर हरियाणा ने वेरिफिकेशन के लिए यूपी के ड्रग कंट्रोलर को लखनऊ भी भेजा। जिन्होंने स्टेट ड्रग कंट्रोलर हरियाणा को पत्र द्वारा सूचित किया कि उपरोक्त डा दीपक कुमार के ली क्रेस्ट ब्लड सेंटर गाजियाबाद के लाइसेंस पर कार्यरत नहीं है। इसकी गहनता से जांच के लिए रोहतक जोन के वरिष्ठ औषधि नियंत्रण अधिकारी कृष्ण कुमार गर्ग , मेरठ डिवीजन के सहायक आयुक्त एफडीए वीरेंद्र कुमार तथा गाजियाबाद के ड्रग इंस्पेक्टर अनुरोध कुमार के साथ 6 सितंबर को ली क्रेस्ट ब्लड सैंटर वसुंधरा ,गाजियाबाद पहुंचे।

वहां मौजूद ले क्रेस्ट हॉस्पिटल के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ विवेक गर्ग ने अपने हस्त लिखित बयानों में बताया कि उपरोक्त डॉ दीपक कुमार ने उनके ली क्रेस्ट ब्लड सेंटर में कभी काम नहीं किया और दीपक कुमार के कथित अनुभव पत्र बारे भी अपनी अनभिज्ञता जाहिर की। इसके उपरांत वरिष्ठ औषधि नियंत्रण अधिकारी रोहतक 7 सितंबर  को सबूत जुटाने एवम अवैध डॉ द्वारा ब्लड सेंटर के संचालन को रोकने हेतु ,नोबल ब्लड सेंटर रोहतक अपनी टीम के साथ गए। वहां डॉ दीपक द्वारा तथा उसकी देखरेख में किए गए रक्तकेंद्र संबंधित कागजात अपने कब्जे में लिए।

चूंकि ब्लड सेंटर 2.04.2020 से लगातार गैर अनुभवी तथा गैर अनुमोदित मेडिकल ऑफिसर की देखरेख में संचालित हुआ था। ऐसे में रक्त एवम रक्त की गुणवता पर भरोसा नहीं किया जा सकता और रक्त दाता तथा रक्त ग्रहता की जान को जोखिम हो सकता है। इस पर रोहतक के वरिष्ठ औषधि नियंत्रण अधिकारी ने उक्त नोबल ब्लड सैंटर का संचालन तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश पारित कर दिए।

गौरतलब है कि नियम के मुताबिक ब्लड सेंटर के स्वतंत्र रूप से मेडीकल ऑफीसर इंचार्ज के पद पर कार्य करने हेतु एमएमबीएस के उपरांत ब्लड सेंटर में एक वर्ष हेतु नियमित तौर पर पूर्व अनुमोदित मेडिकल ऑफिसर की देखरेख में कार्यरत होना/अनुभव होना तथा ब्लड ग्रुप सीरोलॉजी, ब्लड ग्रुप मेथोडोलॉजी और रक्त एवम उसके अवयव निर्माण के चिकित्सीय सिद्धांतों का पर्याप्त ज्ञान जरूरी होता है।

आरंभिक जांच में यह भी पाया गया कि उपरोक्त प्रमाण पत्र संदीप कुमार अहलावत अधिकृत हस्ताक्षरी ली क्रेस्ट ब्लड सेंटर गाजियाबाद जो कि नोबल ब्लड सेंटर का भी महा प्रबंधक है, उससे साठगांठ कर डॉ दीपक ने बनवाया। क्योंकि यह अनुभव प्रमाण पत्र झूठा, जाली और मनगढ़ंत पाया गया और इसका इस्तेमाल करके हरियाणा सरकार के साथ नाजायज फायदा उठाने के लिए धोखाधडी की गई, इसलिए रोहतक के वरिष्ट औषधि नियंत्रण अधिकारी ने थाना अर्बन एस्टेट में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 427,467,468,471 तथा 120B के तहत डॉ दीपक कुमार पुत्र अशोक कुमार निवासी मुनिमपुर ककरोला जिला झज्जर एवम अन्य के विरुद्ध एफआईआर एफआईआर नंबर 361 दिनांक 10.09.2022 दर्ज करवा दी है।

हरियाणा स्वास्थ्य मंत्री श्री अनिल विज ने रक्त केन्द्र संचालकों को आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने केन्द्रों का संचालन कानून के दायरे में रहकर करें। उन्होंने कहा कि अवैध कार्य करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि रक्त दान एक पुनीत कार्य है और इससे खिलवाड़ करने से जनता की भावनाएं भी आहत होती हैं।

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