निजी अस्पतालों पर संघ (आरएसएस) की टेढ़ी नजर

नई दिल्ली

एक तरफ तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)  इस बात पर जोर दे रहा है कि देश में जेनेरिक दवाईयों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, दूसरी और भाजपा सरकार के ताजा कंबिनेशन दवा के संदर्भ में लिए गए फैसले से देश में जेनरिक दवा निर्माण को गहरा धक्का लगेगा। इस विरोधाभासी परिदृश्य के बीच आम आदमी के सस्ते इलाज की राह कठिन होती दिख रही है।

राजस्थान के नागौर में अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख अनिरुद्ध देशपांडे के मुताबिक संघ ने महसूस किया है कि सरकार चिकित्सा शिक्षा और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं के लिए बजट बढ़ाए और पर्याप्त संसधान उपलब्ध कराए। जेनेरिक दवाइयों को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जाए। आयुर्वेद व यूनानी जैसी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाए। देशपांडेय ने सीधा-सीधा कहा कि मुनाफे के चक्कर निजी अस्पतालों की बढ़ती भीड़ के बीच आम आदमी का स्वास्थ्य बिगड़ता और महंगा होता जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाएं आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। ऐसे में जरू री है कि सबको गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार निजी अस्पतालों पर लगाम लगाए। उन्होंने इस बाबत सरकार से आग्रह किया अच्छी चिकित्सा और शिक्षा हर आदमी को उपलब्ध कराना प्राथमिका में शुमार करे। विश्व फलक पर राष्ट्र की तरक्की तभी संभव है, जब देश पूर्ण रूप से साक्षर और स्वस्थ होगा।