हरियाणा में प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री से गुलजार बजार

नाम बड़े और दर्शन छोटे

छापेमारी तो खूब, लेकिन सजा तक पहुंचाने में पीछे है औषधि विभाग

भिवानी

लगता है औषधी नियंत्रण विभाग के दावे मात्र दावे ही साबित हो रहे हैं। नशे की लत ने युवा पीढ़ी को अंधकार में धकेल दिया है। करीब 5 साल पूर्व राज्य औषधी नियंत्रण एवं दवा विक्रेताओं ने नशे पर अंकुश लगाने के लिए सकारात्मक पहल की थी। ऐसा इसलिए कि प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर राज्य औषधी नियंत्रण विभाग के तत्कालीन प्रमुख गिरधारीलाल सिंगला ने दवा विक्रेताओं की बैठक बुलाकर शपथ दिलाई थी। सिंगला सेवानिवृत्त हो गए और जो दूसरे अधिकारी आएं, उनके प्रयास कमजोर साबित होते दिख रहे हैं। दवा की दुकानों पर नशीले पदार्थो का धंधा फिर से फल-फूल रहा है। स्थिति यह है कि नशे के इंजेक्शन, सीरप और गोलियां युवा प्रतिभाओं की धार खत्म कर रही है। पिछले 7-8 सालों में नशे के व्यापारियों को कई मौकों पर रंगे हाथ दबोचा गया। लेकिन पूरी सजा का दौर शायद ही किसी ने झेला हो।

कुछ तो अदालत में साक्ष्यों के अभाव में छूट जाते और कुछ के खिलाफ  औषधी नियंत्रण विभाग की कार्रवाई का ढूल-मूल रवैया राहत दे जाता। रंगे हाथ पकड़े जाने वालों का कारोबार बदस्तुर जारी है। फर्क यह आ गया कि उन्होंने नाम और ठिकाने बदल लिए।

वरिष्ठ औषधी नियंत्रण अधिकारी मनमोहन तनेजा की देख-रेख में करीब तीन साल पहले कृष्णा कॉलोनी में शिव सोडा कॉर्नर पर छापा मारा गया था। छापे के दौरान जूस और शीतल पेय बेचने वाले के पास नशीले इंजेक्शन और दवाओं का जखीरा बरामद हुआ था। विभाग की कार्रवाई लचीली रही और संचालक भाग गया। इसके बाद कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए विभाग ने नोटिस भिजवाए, जिनका कोई नतीजा नहीं निकला। इसी तरह डेढ.- दो साल पहले रामगंज मोहल्ले में एक दवा विक्रेता को दबोचा गया था। क्षेत्र में आम चर्चा थी कि यह दवा विक्रेता युवाओं को नशे के इंजेक्शन लगाता है और भारी-भरकम राशि वसूलता है। छापामारी हुई और संचालक पकड़ा गया, लेकिन औषधी नियंत्रण विभाग पूरे साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया जिस कारण उसे अदालत से राहत मिल गई। इसी प्रकार गर्भ निरोधक दवाओं के सिलसिले में भी एक दुकानदार के खिलाफ  यहां कार्रवाई हुई, लेकिन नतीजा यहां भी सिफर रहा। शहर के रिंग रोड़ और दिनोद रोड़, जीतू वाला जोहड़ क्षेत्र में नशे का व्यापार खूब चल रहा है। शायद इसलिए कि उन्हें विभाग की कार्यशैली का अंदाजा हो चला है।

औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारी कागजी खानापूर्ति के लिए कभी-कभार निरीक्षण करते हैं।
जिला औषधि नियंत्रण अधिकारी संदीप हुड्डा से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि कुछ दवाओं को नियंत्रित किया गया है। जो बिल से आती है और बिल के माध्यम से ही बिक जाती है। बस शर्त है चिकित्सक द्वारा रोगी को उसका परामर्श दिया गया हो। उन्होंने कहा कि अल्प्रराजोल्मए लोराजीपामए कोडिन आदि दवाओं पर नियंत्रण है। वैसे औषधि नियंत्रण विभाग ने नशे में प्रयोग करने वाली दवाओं की सूची पहले ही जारी की हुई है। यदि कोई दवा विक्रेता बिना चिकित्सक परामर्श के नियंत्रित दवाएं बेचता है तो कार्रवाई जरूर होगी।