राजस्थान – एक्सपायर धागों से बेहतर स्वास्थ्य का जाल बुनने की कोशिश

2011-2012 में खरीदे गए करीब चार करोड़ रुपए के सूचर (टांके लगाने के धागे)एक्सपायर हो गए,  मार्च-अप्रैल में तीन करोड़ 62 लाख रुपए के सूचर एक्सपायर होने की श्रेणी में

जयपुर

राजस्थान मेडिकल कार्पोरेशन लिमिटेड (आरएमसीएल) की ओर से वर्ष 2011-2012 में खरीदे गए करीब चार करोड़ रुपए के सूचर (टांके लगाने के धागे)एक्सपायर हो गए हैं। वहीं तीन करोड़ 62 लाख रुपए के सूचर मार्च और अप्रैल माह में एक्सपायर हो जाएंगे। वजह यह कि जिन कंपनियों को टेंडर दिए गए, उन्होंने सूचर की सप्लाई सही नहीं की। अस्पतालों में डॉक्टर्स ने इन्हें घटिया बताते हुए उपयोग से मना कर दिया। नतीजतन ड्रग वेयर हाउस से ये सूचर फिर से आरएमसीएल को भेजे गए और पिछले चार सालों से पड़े हुए उनकी एक्सपायरी डेट भी निकल गई। मामले को दबाने सूचर जिलों के ड्रग वेयर हाउस में भेजे जा रहे हैं। अस्पतालों में निशुल्क दवा योजना के तहत सूचर सप्लाई करने के लिए आर.एम.सी.एल. की ओर से टेंडर निकाले गए। चार कंपनियों ने आरएमसीएल को सूचर दिए। इनमें लोटस, बी-ब्राउन, सुरू, एचएलएल, सेनीटिलिटाल और सूचर इंडिया सप्लाई करने वाली कंपनी थी।
लेकिन जब सूचर ड्रग वेयर हाउस से अस्पतालों में और वहां से ऑपरेशन थियेटर में पहुंचे तो डॉक्टर्स ने सूचर को गुणवत्ताहीन बताया। सर्जरी के डॉक्टर्स का कहना था कि सूचर के धागे बार-बार टूटते हैं और टांके नहीं लगाए जा सकते। यदि उनसे टांके लगाए जाते हैं तो मरीजों को परेशानी हो सकती है। इस संदर्भ में विभाग के डॉक्टर्स ने अस्पताल प्रशासन को शिकायत भी की थी। इसके बावजूद किसी भी कंपनी पर ना तो जुर्माना लगाया गया और न ही उनसे नया माल लिया गया।
एसएमएस अस्पताल सहित अन्य जिला अस्पतालों में गुणवत्ताहीन सूचर की सप्लाई के बाद अस्पतालों को निजी स्तर पर इनकी खरीद करनी पड़ी।
वर्ष 2011-2012 में सात करोड़ 66 लाख रुपए के सूचर खरीदे गए। कुछ ही दिन बाद सूचर के गुणवत्ताहीन होने का पता चला और आरएमसीएल में माल रख लिया गया। सूचर को विभिन्न जिलों के ड्रग वेयर हाउस भेजा जाने लगा है। वर्ष 2016 की 28 फरवरी तक करीब चार करोड़ के सूचर एक्सपायर हो गए। शेष मार्च और अप्रैल माह में एक्सपायर हो जाएंगे।
आरएमसीएल को मामले की पूरी जानकारी होने के बावजूद माल के रखे रखना, कंपनी को माल नहीं लौटाना, जुर्माना नहीं लगाना मिलीभगत की आशंका उजागर करता है।
चिकित्सा मंत्री का कहना है कि यह वर्ष 2011 का मामला है। अभी जानकारी में नहीं आया है। यदि ऐसा किया गया है तो बहुत ही गंभीर बात है। उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी।