भोपाल – यहां अस्पतालों में जिंदगी का ज्यादा खतरा

जधानी के मॉडल जेपी अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था उठे सवाल

भोपाल – मध्य प्रदेश

आम आदमी के साथ-साथ राजधानी में बैठे जिम्मेदार अफसर और स्वास्थ्य मंत्री भी देखें कि शहर में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति कितनी बदहाल है। विधानसभा के सामने सडक़ हादसे में जख्मी नौजवान को लेकर उसका पिता राजधानी के जिला अस्पताल में पहुंचता है, लेकिन इमरजेंसी वार्ड से उसे इसलिए लौटना पड़ता है, क्योंकि वहां ऑक्सीजन देने के लिए सेक्शन मशीन खराब थी। यह हालात केवल जेपी अस्पताल के नहीं, बल्कि हमीदिया सहित अन्य दूसरे सरकारी अस्पताल में भी है। हार्टअटैक के मरीजों को आंख का डॉक्टर देखता है तो इमरजेंसी के ऑपरेशन थिएटर में जंग लगे उपकरण हैं।

भोपाल यूं तो जेपी अस्पताल प्रदेश का मॉडल अस्पताल है। इमारत शानदार है, लेकिन इलाज लचर। ऑक्सीजन सिलेंडर की नॉब खराब दिखी तो सक्शन मशीन बेकार। इमरजेंसी की स्थिति यह है कि ट्रॉमा के मरीजों का इलाज आंख का डॉक्टर करता मिला। हार्टअटैक के मरीज को जेपी अस्पताल लेकर कुछ लोग पहुंचे तो वहां जूनियर डॉक्टर मौजूद था। डॉक्टर को समझ में कुछ नहीं आया तो मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. आरके तिवारी को बुलाया। डॉ. तिवारी करीब आधे घंटे बाद आए और जांच करने के बाद हमीदिया भेज दिया। सक्शन मशीन खराब होने के कारण एक घायल को समय पर उपचार नहीं मिलने मौत हो गई। अस्पताल में सोनोग्राफी, एक्सरे मशीन भी खस्ताहाल हैं।
हमीदिया अस्पताल की सुनो, यहां इमरजेंसी में घायल मरीज डॉक्टर के इंतजार में तड़पता रहा। एक घंटे इंतजार के बाद भी डॉक्टर नहीं आए तो ड्रेसर ने ही मरहम पट्टी कर दी, बाद में परिजन मरीज को लेकर किसी दूसरे अस्पताल चले गए।

जेपी अस्पताल के अधीक्षक का कहना है कि सक्शन मशीन काम नहीं कर रही थी। इस बारे में जानकारी नहीं है। अस्पताल में व्यवस्थाएं सही हैं, फिर भी दिखवाता हूं कि कौन-कौन सी मशीन खराब हैं। हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक का कहना है कि ट्रॉमा यूनिट की स्थापना मरीजों को तुरंत उपचार के लिए की गई है। जल्द ही इसमें और भी सुविधाए जोड़ी जाएंगी। डिजिटल एक्सरे भी शुरू होने वाला है।