जन औषधि स्कीम का दायरा बढ़ा रही है क्रेंद सरकार

नई दिल्ली

गंभीर और लंबी बीमारियों के इलाज के खर्च में भारी कमी लाने में केंद्र सरकार की ओर से शुरू किए जा रहे जन औषधि मेडिकल स्टोर अहम भूमिका में नजर आ रहे हैं। ब्यूरो ऑफ फार्मा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग ऑफ इंडिया (बीपीपीआई)के तहत खुल रही इन दवा दुकानों में हर तरह की दवाएं 10 से 95 फीसदी कम दामों में उपलब्ध हैं।


विभाग की प्रवक्ता सिनि रनिल का कहना है कि हम अपनी दुकानों के लिए सौ से ज्यादा मल्टी नेशनल दवा कंपनियों से सीधे दवा खरीद रहे हैं। इसकी वजह से सभी दवाएं बहुत की कम कीमतों में उपलब्ध होती हैं। शुगर से लेकर कार्डियक और एंटीबायोटिक्स तक सभी दवाएं मरीजों को यहां आसानी से मिल सकती हैं। 2017 तक देश में 3000 से ज्यादा स्टोर खोल देंगे। इन दुकानों को सरकारी और निजी अस्पतालों के प्रांगण में या पास में ही खोला जाएगा।

इधर सरकार जन औषधि स्कीम का दायरा और बढ़ा रही है। इसमें 439 जीवन रक्षक दवाओं को और बढय़ा जाएगा। जिसमें कैंसर और कार्डियोवस्कूलर ड्रग भी शामिल हैं। साथ ही स्टेंट सहित 250 मेडिकल डिवाइस भी इन औषधि भंडारों पर40 से 50 प्रतिशत के डिस्काउंट पर मिलने लगेंगे। मार्च तक जन औषधी भंडारों की संख्या 121 से बढक़र 300 की जाएगी। इन स्टोर्स पर 439 दवाएं मिलने लगेंगी। अभी इन दुकानों पर मात्र 45 दवाएं मिल रही हैं।

फिक्की के सेेक्रेटरी जनरल इस मामले में कहते हैं कि जरूरी दवाओं की कीमतों को नियमित करने की सरकार की पहल का हम स्वागत करते हैं। लेकिन जिस तरह से डीपीसीओ 2013 को सरकार ने लागू किया उसे लेकर इंडस्ट्री के कुछ मुद्दे हैं, जिनसे सरकार को अवगत करा दिया गया है।
ब्रैंडेड दवाओं की कीमतों में भी कमी देश में सिर्फ बीमारी के इलाज और दवाओं पर खर्च की वजह से औसतन तीन फीसदी परिवार गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं। इस तथ्य वाली तेंदुलकर कमेटी की रिपोर्ट को जब जारी किया गया था तो पूरे देश में बहस छिड़ गई थी। कुछ दवाओं को लेकर दो सालों में तस्वीर बदलने लगी है। कीमतें 20 से 90 फीसदी तक घट गई हैं। एक साल पहले कार्डियो से संबंधित बीमारी की खास दवा एमलोडोपि की कीमत 80 रु. थी।

अब कीमत में 94 फीसदी की कमी आ गई है और इसे मात्र 5 रु. में किसी भी ड्रग स्टोर से खरीदा जा सकता है। डायबिटीज की दवा ग्लीमेप्राइड का दस गोलियों का पत्ता 54 रुपए के बजाए 4 रु. में मिल रहा है। इस बारे में राजस्थान सरकार में असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर मनोज का कहना है कि 2013 में लागू किए गए ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर के बाद बदलाव दिख रहा है। 648 विभिन्न दवाओं के फॉर्मूलों की कीमतों को रेगुलेट करने के बाद इलाज में सुविधा हो रही है। सरकार की ओर से दवाओं के औसत दाम तय करने के बाद कंपनियों की ब्रैंडेड दवा की कीमत कम हो गई हैं।