तकनीक अपडेट के नाम पर दवा खरीद में लगेगी लाखों की चपत !

जयपुर

नि: शुल्क दवा योजना में आईवी फ्लूइड (ग्लुकोज) की खरीद में सरकार को करीब 20 करोड़ रुपए का फटका लगाने की तैयारी है। कुछ विदेशी कंपनियां नई तकनीक के नाम पर पुरानी तकनीक वाली कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए लॉबिंग कर रही हैं। जबकि पुरानी तकनीक वाली 80 फीसदी कंपनियां हैं जो कम दरों में ग्लुकोज की आपूर्ति राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन को करती हैं।

इस बार 50 करोड़ का ग्लुकोज खरीदा जाना था। पुरानी तकनीक वाली कंपनिया 11 से 13 रुपए में आपूर्ति करती हैं, जबकि नई तकनीक वाली कंपनियां 17 से 20 रुपए में। इस तरह करीब 20 करोड़ ज्यादा कीमत पर ग्लुकोज खरीदने का रास्ता ढूंढा जा रहा है। नई तकनीक वाली कंपनियां कई बार दबाव बनाने की कोशिश कर चुकी हैं। हर बार औषधि नियंत्रक ने उनका तर्क खारिज कर दिया। कहा-तकनीक से मरीजों को कोई मतलब नहीं है। दोनों तरह की तकनीक में ग्लुकोज की गुणवत्ता समान है। इसलिए किसी कंपनी को निविदा से बाहर नहीं किया जा सकता।

दवाओं की गुणवत्ता परखने का काम पूरे देश में औषधि नियंत्रण संगठन ही करते हैं। इस बार भी जब नई तकनीक वालों ने दबाव बनाया तो एक बार फिर औषधि नियंत्रक की राय ली गई। राय मिली कि पुरानी को बाहर करना ठीक नहीं है। क्योंकि दोनों की गुणवत्ता समान है। इस राय के बाद इसकी समीक्षा के लिए नई समिति बना दी गई, उसमे भी एसएमएस अस्पताल के कुछ डॉक्टरां को शामिल किया गया। जबकि गुणवत्ता परखने का उनका वैधानिक अधिकार ही नहीं है।

पूर्व औषधि नियंत्रक का कहना है कि कौनसी तकनीक वाली ग्लूकोज खरीदें, यह जानने के लिए अब डॉक्टरों को शामिल करते हुए समीक्षा समिति बनाई है। इससे ज्यादा अभी मैं कुछ नहीं बता सकता।