ब्रैंडेड जेनरिक दवाएं क्या मिल पाएंगी आमजन को सस्ती

नई दिल्ली

केंद्र सरकार का गुणगान

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के फॉर्मास्युटिकल विभाग को निर्देश जारी कर कहा कि वो दवा बनाने वाली ब्रैंडेड कंपनियों की जेनरिक दवाओं की कीमत कम कराए। जारी निर्देश के मुताबिक ब्रांडेड कंपनियों को उनकी जेनरिक दवाओं के डिब्बों पर उनका वास्तविक एमआरपी प्रिंट करना होगा। विभाग की मानें तो ऐसा होने पर लोगों के पास ब्रांडेड कंपनियों की जेनरिक दवा 80 प्रतिशत तक दाम पर पहुंचेगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा मुहैया कराना आसान होगा।

दवा बनाने वाली नैशनल एवं मल्टीनैशनल कंपनियां अभी अपनी जेनरिक दवाओं पर भी ब्रैंडेड के बराबर कीमत बतौर एमआरपी प्रिंट करते हैं। हालांकि यह दवाएं ब्रैंडेड दवा की तुलना में 80 फीसदी तक सस्ती होती है। कंपनियां इन्हें सस्ते दामों पर बेचती भी हैं, लेकिन रिटेलर और होल सेलर इन दवाओं को अपने हिसाब से बेचते हैं। इसकी वजह जेनरिक दवाओं पर पड़ी ऊंची एमआरपी होती है। मेडिकल स्टोर पर मरीजों को एमआरपी का हवाला देकर रिटेलर ज्यादा लाभ कमाते हैं। कंपनियां ऊंची एमआरपी इसलिए प्रिंट कराती हैं, ताकि दवा विक्रेता उनकी जेनरिक दवा के साथ ब्रैंडेड दवा भी बेचते रहे। इस पूरे प्रकरण में मरीजों को कम कीमत की दवा भी ऊंचे दामों पर लेनी पड़ती है।