सात दवा कंपनियों की दवाइयां गुणवत्ताविहीन

नई दिल्ली
केंद्रीय औषधी मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा करवाई गई जांच में देश के 22 दवा उद्योगों में निर्मित 25 दवाइयां गुणवत्ता मानको पर खरा नहीं उतर सकी हैं। इस जांच में प्रदेश के सात नामी दवा उद्योगों में निर्मित दवाएं भी सब-स्टैंडर्ड पाई गई हैं। हिमाचल के ये उद्योग सिरमौर व सोलन जिला के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित हैं। इन सात उद्योगों में निर्मित दस दवाएं गुणवत्ता के मापदंडों पर खरा नहीं उतर सकी हैं। यह खुलासा केंद्रीय औषधी मानक नियंत्रण संगठन द्वारा जारी ड्रग अलर्ट में हुआ है। इस लिस्ट में हिमाचल के अलावा उत्तराखंड, मुंबई, आसाम , बिहार , गुजरात व हरियाणा में स्थापित उद्योग भी शामिल हैं। दवाइयों के ये मामले मुंबई, गुवाहाटी, कोलकाता, चंडीगढ़ की औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में किए गए परीक्षण के  दौरान सामने आए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के र्निदेश के बाद ड्रग कंट्रोलर ने दवा कंपनियों को नोटिस जारी करते हुए उन्हें बाजार से फेल हुए दवा उत्पादों का पूरा बैच हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। ड्रग इंस्पेक्टरों को इन दवा कंपनियों का निरीक्षण करने की हिदायत दी गई है। देश भर में परीक्षण के दौरान गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरने वाले दवा उत्पादों के बारे में आम जनता को सूचित करने के मकसद से केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने ड्रग अलर्ट जारी करने की कवायद शुरू की है। इस अलर्ट का मकसद ऐसे दवा उत्पादों, जो मानक गुणवत्ता की कसौटी पर खरे न उतरे हों, नकली, मिलावटी या गलत ब्रांडेड पाए गए हों, की जानकारी राज्यों के दवा नियामक प्राधिकरणों को देते हुए तत्काल इसकी आपूर्ति व बिक्री पर प्रतिबंध लगाना है,ताकि जनता को जल्द ऐसे उत्पादों के इस्तेमाल से रोका जा सके।

इन कंपनियों की ये दवाइयां फेल-सीडीएससीओ द्वारा जारी जनवरी 2016 के ड्रग अलर्ट में जिन दवाओ के सैंपल जांच के दौरान फेल हुए है उनमें  संक्रमण, पेन किल्लर , पेट के रोगों, सनबर्न, गैस्ट्रो, खून बढ़ाने सहित अन्य रोगों के उपचार की दवाएं शामिल हैं।  हिमाचल के जिन दवा उद्योगों के सैंपल फेल हुए हैं वे भटोलीक लां बद्दी, कालाअंब, गोंदपुर पांवटा साहिब में स्थापित हैं।