मध्य प्रदेश में यूपी की तर्ज पर चल रहा है खरीददारी में घोटोला

भोपाल
35 हजार की किट 9 लाख में खरीदी

मात्र 35 हजार रुपए कीमत के ऑपरेशन किट की खरीदी 9 लाख 98 हजार रुपए में की गई। ऐसी ही अन्य खरीदी में सरकार के एक विभाग ने 48 करोड़ रुपए ठिकाने लगा दिए। यह अनियमितता वित्त विभाग की जांच में उजागर हुई है।
इसमें खास बात यह रही कि श्रम विभाग ने वर्ष 2015-16 के बजट में मांगे थे 30 करोड़ रुपए और उसे 48 करोड़ रुपए दे दिए गए। यानी 18 करोड़ रुपए ज्यादा। ज्यादा राशि दिए जाने के लिए जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। वित्त विभाग ने घोटाले की जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भेज दी है और श्रम विभाग से कहा है कि गड़बड़ी की जांच कर अवगत कराएं।

दरअसल इस गड़बड़झाले की शुरूआत बीमा अस्पतालों में इंस्ट्रूमेंट खरीदी और दवा खरीदी से हुई जिसमें अफसरों ने कमीशन के चक्कर में तीस गुना ज्यादा कीमत में सामग्री खरीद ली। इस खरीदी में वित्त विभाग के नियमों को दरकिनार कर दिया गया। विभाग को साल भर का बजट आवंटन 30 करोड़ का होना था, जबकि उसे 48 करोड़ रुपए दे दिए गए। यानी 18 करोड़ रुपए ज्यादा। वित्त विभाग के अफसरों का कहना है कि कि सामान्य तौर पर विभाग द्वारा मांगे गए बजट में से भी पांच से दस प्रतिशत तक की कटौती की जाती है। जब बीते वर्ष 2014-15 में विभाग का बजट 16 करोड़ रुपए था तो इस साल के बजट में तीन गुना 48 करोड़ रुपए बजट कैसे दिया गया।