सैंकड़ों दवाओं के साइडइफेक्ट

लखनऊ

जरा सी बात पर एंटीबॉयोटिक या दर्द निवारक गोलियों का इस्तेमाल करने से पहले सौ बार सोचिए। ये दवाएं शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की बजाय आपको और बीमार कर सकती हैं। ये न केवल त्वचा संबंधी परेशानियां पैदा कर सकती हैं बल्कि लीवर, किडनी तक डैमेज कर सकती हैं। मोती लाल नेहरू मेडिकल (एमएलएनएम) कॉलेज के फार्मोकोलॉजी विभाग की ओर से दवाओं के साइडइफेक्ट को लेकर तैयार की गई रिपोर्ट में उक्त चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। विभाग ने इस रिपोर्ट को ‘गाजियाबाद स्थित इंडिया फार्माकोलॉजी कमीशन’ को भी भेजा और कमीशन ने कई दवाओं पर चेतावनी भी जारी कर दी है।

मरीजों में शुरू हुई परेशानियों के आधार पर एमएलएनएम कॉलेज में दवाओं की मॉनीटरिंग के लिए स्थापित सेंटर की ओर से जांच के बाद बीते डेढ़ साल में साइडइफेक्ट करने वाली दो सौ दवाओं की रिपोर्ट तैयार की गई। ये मरीज एमएलएनएम कॉलेज के स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में उपचार के लिए आए थे। सेंटर के विजिलेंस ऑफिसर वीरेंद्र सिंह कहते हैं कि साइडइफेक्ट देखकर ऐसी दवाओं के सेवन से मना कर दिया गया है। सबसे ज्यादा जिन दवाओं में साइडइफेक्ट पाए गए उनमें एंटीबॉयोटिक और दर्द निवारक गोलियां शामिल हैं। सबसे अधिक घातक एंटीबायोटिक दवाएं (टैबलेट, कैप्सूल दोनों) हैं। भेजी गई दो सौ दवाओं में से 60 से अधिक एंटीबायोटिक दवाएं ही हैं। दूसरे नंबर पर दर्द निवारक गोलियां हैं। कई कॅफ सीरप, इंजेक्शनों से भी लोगों को परेशानियां हुई हैं। इसके अलावा एचआईवी की दवाओं के साइडइफेक्ट भी पाए गए हैं। फार्मोकोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ.आरके चौरसिया कहते हैं कि साइडइफेक्ट करने वाली दवाओं के नामों को गाजियाबाद स्थित इंडिया फार्माकोलॉजी कमीशन (आईएफसी) जारी करता है। जिन दवाओं के साइडइफेक्ट ज्यादा होते हैं, उनके लिए तुरंत चेतावनी जारी कर दी जाती है। इलाहाबाद सेंटर से भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर दर्जन भर दवाओं के बारे में चेतावनी जारी की गई है। वार्मिंग के जरिए चिकित्सकों को ऐसी दवाओं के सेवन की सलाह न देने के लिए सचेत किया गया है।