केजरी सरकार की जमीनी हकीकत

नई दिल्ली

सरकार के दावों के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में हर मर्ज की दवा फ्री मिलेगी और मरीजों की जांच भी मुफ्त में ही होगी, लेकिन दिल्ली सरकार के अस्पतालों में इस योजना को लागू कराना शुरुआती दिनों में मुश्किल नजर आ रहा है कहीं दवाइयों के लिए लंबी कतारें तो कहीं स्टाफ की कमी से अस्पताल जूझ रहे हैं। मुफ्त दवा के इंतजार में दवाखाने के काउंटर पर लंबी कतारें लगी हैं लेकिन जिस विंडो से फॉर्मेसिस्ट दवा देकर मरीजों का दर्द कम करता है उसके दरवाजे ही बंद है जहां विंडो खुली हैं वहां भी मरीजों की लंबी कतारें सरकारी अस्पतालों की बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं।
सिर्फ दवाओं के लिए नहीं बल्कि ब्लड टेस्ट जैसे एक साधारण सी जांच के लिए भी मरीजों को घंटो इंतजार करना पड़ता है। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों की खस्ता हालत को सुधारने की कोशिश करते हुए दिल्ली सरकार ने ऐलान किया कि फरवरी से सरकारी अस्पतालों में सभी दवाएं मुफ्त मिलेंगी लेकिन सरकार के दावों के उलट सरकारी अस्पताल पूरी तरह इस
योजना के लिए तैयार नहीं दिखाई दे रहे हैं सरकार की अनिवार्य दवा सूची में करीब 700 दवाएं शामिल हैं जो सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को मुफ्त दी जानी हैं लेकिन पुरानी दिल्ली के लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल की सूची बता रही है कि कई दवाएं अभी भी अस्पताल के दवाखाने में मौजूद नहीं हैं, कुछ ऐसा ही हाल पूर्वी दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल का है कहने को तो दवा वितरण केंद्र में 10 काउंटर हैं लेकिन 10 में से 3 काउंटर स्टाफ की कमी की वजह से बंद हैं। लिहाजा दवा का इंतजार मरीजों और तिमारदारों का दर्द बढ़ा रहा है हालांकि दवाओं की उपलब्धता के मामले में पूर्वी दिल्ली के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल का हाल एलएनजेपी और जीटीबी से बेहतर नजर आया। अस्पताल प्रशासन की मानें तो सरकार की योजना को अमल में लाने की कवायद शुरू हो चुकी है।

दिल्ली सरकार के मुताबिक अलगे चार महीने में राजधानी के पांच बड़े सरकारी अस्पतालों में 24 घंटों नि: शुल्क दवा मिलेगी अब सवाल ये है कि जो अस्पताल पहले ही डॉक्टरों और स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं वहां हर मर्ज की दवा 24 घंटे उपलब्ध कराना दिल्ली सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।

ये हैं सरकारी अस्पताल की खराब हालत की वजह-दिल्ली सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए योजना के मुताबिक सरकारी अस्पतालों मे बढ़ते मरीजों के दबाव को कम करने के लिए मोहल्ला क्लीनिक पॉली क्लीनिक जैसे उपचार केंद्रो को बढ़ावा दे रही है लेकिन जांच उपकरणों और दवाईयों की कमी की वजह से लोग इन केंद्रों का पूरी तरह फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत पॉली क्लीनिक तो खोल दिए हैं। आने वाले दिनों में 150 मोहल्ला क्लीनिक और 100 पॉलीक्लिनीक दिल्ली के अलग अलग विधानसभा खोलने की तैयारी भी है लेकिन समस्या सिर्फ

इंफ्रास्ट्रक्चर की नहीं बल्कि मैनपावर की भी है। अस्पताल प्रशासन की मानें तो राजधानी के सरकारी अस्पताल डॉक्टरों और पैरामैडिकल स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। हालांकि सरकार खाली पदों को भरने पर विचार कर रही है लेकिन फिलहाल अस्पतालों में दवाओं के कम से कम 12 घंटे मिलने की योजना पर भी स्टाफ की कमी का असर साफ दिख रहा है।