बेंगलूरु में AIOCD की राष्ट्रीय बैठक का आयोजन

बेंगलूरू
सुरेश गुप्ता के रवैये से दिखी खेमेबंदी और अव्यवस्था
एआईओसीडी की राष्ट्रीय बैठक में बेशक राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.एस शिंदे और संस्थापक अध्यक्ष वी. एल. त्यागराज की गरिमामयी उपस्थिति रही, बावजूद इसके आयोजनपूरी तरह राष्ट्रीय महासचिव सुरेश गुप्ता के कब्जे में दिखा। हालत यह थी कि बैठक में होस्ट की ओर से पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मौजूद केरल अध्यक्ष एवं जोन अध्यक्ष साऊथ ए.एन. मोहन को स्वागत कक्ष में उपस्थिति लिस्ट में अपने हस्ताक्षर करने तक से रोक दिया। जब कारण पूछा गया तो दो टूक कहा, गुप्ताजी के ऐसे आदेश हैं। हिमाचल अध्यक्ष एवं नार्थ जोन अध्यक्ष संजीव पंडित को हवाईअड्डे  से निजी खर्चे पर बैठक हाल आना पड़ा जबकि आयोजन के अनुरूप व्यवस्था यह थी सदस्यों को आने-जाने और रहने के खर्च से मुक्त रखा जाएगा।  राज्यध्यक्ष को छोड़ो, जोन अध्यक्ष को भी रूम नहीं मिला।  हरियाणा को राष्ट्रीय महासचिव ने दो पाटों में विभाजित किया हुआ था। जिन लोगों की उपस्थिति सुरेश गुप्ता के चैनल से हुई, बेशक उनमें से कई एआईओसीडी सदस्य नहीं थे,  को भी आने-जाने और रुकने की भरपूर व्यवस्था की गई।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने लिखित रूप से आयोजन प्रभारी बी. हरिकृष्णा को कहा था कि सदस्यों के आने-जाने और ठहरने में किसी प्रकार की कोताही नहीं होनी चाहिए, लेकिन आलम यह था कि बैठक में व्यवस्था का हिस्सा बनना है तो सुरेश गुप्ता का सानिध्य होना बेहद आवश्यक है। राष्ट्रीय अध्यक्ष शिंदे के न तो पत्र को तवज्जो मिली और न ही उपस्थिति के बावजूद उनके निर्देशों को। प्रभारी हरिकृष्णा को शिंदे के फोन कॉल को नजरअंदाज करते देखा गया। दूर-दराज से आए परेशान सदस्यों ने निजी खर्चों पर खुद अपनी जिम्मेदारी उठाई। सदस्यों को इस तरह परेशान होता देख, शिन्दे ने अपने आरक्षित टीपुसुल्तान लॉज में साथ रहने को कहा, खासकर हरियाणा महासचिव अशोक सिंगला और उनके साथ आए अन्य दो साथियों  से आग्रह किया। शिंदे ने आयोजकों की लापरवाही से हुई अव्यवस्था के लिए उपस्थित सदस्यों से माफी मांगी।


राष्ट्रीय महासचिव के अंदाज से उलझन

यूं तो किसी भी संस्था का महासचिव संस्था के उत्थान, संस्था की मजबूती हेतु कार्य करने में अहम जिम्मेदारी का वहन करते हैं परन्तु राष्ट्रीय महासचिव एआईओसीडी सुरेश गुप्ता तो मानों ऐसा लग रहा है कि राष्ट्रीय संगठन को क्षीण करने का  जिम्मा उठा रखा है। अरूणाचल प्रदेश में समानान्तर संगठन को अस्तित्व में लाए जबकि न्यायालय ने समानान्तर संगठन को दरकिनार कर दिया। आगामी सुनवाई मार्च 2016 में होगी। पंजाब राज्य स्तरीय चुनावों की प्रणाली पर सवालिया निशान लगाया। छत्तीसगढ़ बैठक में पंजाब को रेड कार्ड दिखाया। बेंगलुरू बैठक से पहले पंजाब के निर्वाचित राज्याध्यक्ष राज्य महासचिव व पराजितों ने चुनावी प्रक्रिया को मनाना। बैठक में जे.एस. शिन्दे ने पंजाब के मामले में दखल देते हुए कहा कि पंजाब के चुनाव सही प्रकार हुए कोई डी.एफीलेशन नहीं। हरियाणा का मामला न्यायालय में विचाराधीन परन्तु गुप्ता ने न्यायालय आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए मनीष मित्तल को बतौर प्रदेशाध्यक्ष मानते हुए सुविधाएं उपलब्ध करवाई। बैठक में बकायदा सीट पर भी मनीष मित्तल प्रदेशाध्यक्ष एच.एस. सी.डी.ए. की नेम प्लेट लगवाई हुई थी।  केरल में भी उठा पटक जारी है परन्तु ए.एन. मोहन के कुश्ल नेतृत्व में कुछ बिगाड़ नहीं पा रहे। राज्यस्थान में राज्य स्तरीय चुनावों में पूरे पैनल के विरुद्ध जम के कसरत की परंतु गुप्ता के उम्मीदवारों को भारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। बैठक में यह उलझन साफतौर पर दिख रही थी कि आखिर राष्ट्रीय महासचिव सुरेश गुप्ता संगठनात्मक शक्ति बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं या फिर औषधि निर्माता कं. एवं दवा व्यवसायियों का शोषण करने पर तुले हैं।

31 जनवरी 2016 की बैठक की शुरूआत में जहां राष्ट्रीय संगठन के कोषाध्यक्ष वेंकटपति राजू मंच पर नहीं गए। वहीं ए.एन. मोहन ने स्वयं की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान होने के बावजूद हस्ताक्षर करने, प्रवेश से रोका। इस पर मध्यप्रदेश के राजीव सिंगला, बिहार के पी.के.सिंह, महाराष्ट्र के अनिल भाऊ आदि ने सुरेश गुप्ता की नीति पर सवालिया निशान लगाए। पी.के. सिंह ने तो गुप्ता पर दंत उत्पीडन तक की संज्ञा दे डाली।

विरोध को शांत करने के मन से पहले गुप्ता ने मंच से नीचे आकर वेंकटपति राजू कोषाध्यक्ष ए.आई.ओ.सी.डी, एवं ए.एन. मोहन  पूर्व राष्ट्रीयाध्यक्ष एवं वर्तमान में केरल अध्यक्ष व जोन अध्यक्ष को करबद्ध निवेदन किया और उचित स्थान लेने को कहा। हालांकि राजू व मोहन मंच पर बैठक तो गए लेकिन विरोध स्वरूप पुष्पगुच्छ स्वीकार नहीं किए।

जब संगठनात्मक मुद्दे पर चर्चा जोरों पर थी तो  गुप्ता की कार्यप्रणाली पर खुलेआम उंगलियां उठ रही थी। हरियाणा के अनिल दत्त शर्मा ने अचानक अपने स्थान से खड़े हो कर ऊंची आवाज में बोलना शुरू किया तो कुछ लोगों ने कहा बैठक में लोकतांत्रिक व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए इसे  हाईजैक कर रखा है। इस पर राष्ट्रीय अध्यक्ष शिंदे ने अनिल दत्त शर्मा की कड़े शब्दों में निंदा की और कर्नाटक अध्यक्ष हरिकृष्णा को कहा, क्यों न इस कृत्यके लिए शर्मा को सदन से बाहर किया जाए। इस पर अनिल दत्त शर्मा के लाख मिन्नत के बावजूद कुछ मिनट बाद उन्हें बाहर कर दिया गया।

पंजाब प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि गत बैठक में पंजाब के बारे में डीएफीलेट शब्द को वापिस लिया जाए। उनके चुनावों में पूर्ण पारदर्शिता बरती गई थी। जे.एस. शिन्दे ने कहा पंजाब डी एफीलेट नहीं है। मिनटस में लिखे शब्दों को लेकर गुप्ता को कई  बार अपने शब्दों को वापिस लेना पड़ा क्योंकि कुछ जरूरी बातों का मिनटस में जिक्र ही नहीं था। कुछ बातों को बढ़ा चढ़ा कर लिखा गया था। गुप्ता ने कहा कि मिनटस शब्द -ब-शब्द लिखेंगे पिछली मीटिंग के मिनटस भी ठीक लिखेंगे।

मेडीकेयर के जरिये संस्थापक अध्यक्ष का संदेश

बैठक में एआईओसीडी के फाऊंडर प्रेसिडेंट वी.एल. त्यागराज भी आए। उन्होंने मेडीकेयर न्यूज को बताया कि आज के समय में एआईओसीडी 40 वर्ष का हो गया। अब 41वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। उनके समय में इतने सदस्य नहीं थे अब परिवार बड़ा हो गया है। मैं सन्देश देना चाहता हूं  कि परिवार को मजबूती देनी चाहिए। इसे कमजोर न होने दें। हरियाणा से आई.डी. अग्घी को अपने समय का साथी बताया।

एकजुटता ने रोकी ई-फॉर्मेसी की राह

ई-फार्मेसी को लेकर एआईओसीडी की देश भर में विरोध-प्रदर्शन-हड़ताल आखिरकार रंग लाई और 31 जनवरी 2016 को बेंगलूरुमें एआईओसीडी के राष्ट्रीय मंच से मजबूत लहजे में पदाधिकारियों ने कहा कि अब दवा व्यावसायियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। देश में ई-फार्मेसी नहीं चलेगी। उनके हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। कर्नाटक राज्य के सहयोग से आयोजित इस बैठक में राष्ट्रीय बंद की सफलता पर राज्यों का धन्यवाद मंच से किया किया। हाऊस को बताया कि सरकार ने ई. फार्मेसी बंद करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया है।

केंद्रीय सरकार द्वारा प्रतावित ड्रग्स लाइसेंस की फीस वृद्धि 3,000 से बढ़ा कर 30,000 प्रति पांच वर्ष के बारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.एस. शिन्दे ने बताया कि इस प्रस्ताव के विरोध में 12 फरवरी 2016 तक सुझाव मांगे जिसमें सदन से 5, 10, 20 प्रतिशत वृद्धि के सुझाव आए।  अधिकतर जवाब फीस को जस की तस रखने के आए तो एक मत से फीस वृद्धि को नामंजूर करते हुए 3,000/- प्रति पांच वर्ष ही रखने की मध्यप्रदेश महासचिव राजीव सिंघल की आवाज को बुलंद अंदाज में  सहमति दी। शिंदे ने कहा कि सदन से आए सुझावों पर केंद्रीय सरकार को फीस वृद्धि न करने का अनुरोध और सदन की भावनाओं से अवगत करवाएंगे, सरकार ने मांग नहीं मानी तो अनिश्चितकालीन हड़ताल करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।