नि:शुल्क की दवा के बदले मरीज को देने पड़े 50 लाख

जयपुर

सरकार और चिकित्सा विभाग का आमजन को बेहतर और तुरंत इलाज देने का वादा सरकारी तंत्र के आगे विफल ही है। इसकी पुष्टि करने के लिए काफी है एसएमएस अस्पताल। दुनिया की सबसे अधिक ओपीडी वाला अस्पताल होने के कारण यहां मरीजों का अत्यधिक दबाव है। इसी का फायदा उठा रहे हैं यहां के कर्मचारी। नि: शुल्क दवा की दवाएं इसलिए नहीं पहुंचाई जाती क्योंकि निजी दुकानों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। खराब मशीनें इसलिए सही नहीं कराई जा रही कि उसमें औपचारिकताएं बहुत हैं। दोनों ही परिस्थितियों में नुकसान मरीजों का हो रहा है।
एसएमएस अस्पताल में सीटी स्केन के लिए जरूरी ऑमिनीपेक इंजेक्शन (50 एमएल) में हर दिन लाखों रुपए का खेल हो रहा है। नि: शुल्क दवा योजना में होने के बाद भी यह इंजेक्शन पिछले एक महीने से मरीजों को नहीं मिल रहा है।
वजह बताई जा रही है कि ड्रग वेयर हाउस में इंजेक्शन नहीं आ रहे। लेकिन अस्पताल को आदेश हैं कि यदि किन्हीं कारणों से ड्रग वेयर हाउस से जरूरी दवाओं की सप्लाई नहीं हो तो स्थानीय स्तर पर खरीद कर मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई जाएं। लेकिन मिलीभगत के इस खेल के चलते मरीजों को यह इंजेक्शन खरीद कर लाने पड़ रहे हैं। यहां तक कि मरीजों से सीरिंज तक निजी दुकानों से मंगाई जा रही हैं।
मिलीभगत का यह खेल – यह दवा और सीरिंज व अन्य चीजें निजी दुकानों से आती हैं। ऐसे में एक दिन में ही दो लाख रुपए और एक माह में 60 लाख रुपए की दवाएं निजी दुकानों से आ जाती हैं। ऐसे में निजी दुकान संचालकों को लाभ पहुंचाने के लिए अस्पताल स्तर पर मिलीभगत को इंकार नहीं किया जा सकता।
एक साल से सही नहीं कराई –  खराब मशीन के बारे में संबंधित डॉक्टरों का कहना है कि इसे सही नहीं कराने का कारण है पीसीपीएनडीटी के सख्त नियम। विभागीय अधिकारियों ने इसे सही कराने की कवायद भी की लेकिन सोनोग्राफी मशीन के लिए होने वाली औपचारिकताओं और नियमों के चलते इसे सही नहीं कराया गया। इसे सही नहीं कराए जाने के कारण जहां लाखों रुपए की मशीन कबाड़ बनती जा रही है वहीं मरीज भी परेशान हो रहे हैं।