हरियाणा के हर सातवें छात्र में खून की कमी

करनाल
हरियाणा के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को स्वास्थ्य रखने के लिए शुरू की गई मिड-डे-मील और आयरन की गोलियां देने की योजना फेल होती दिख रही है। शैक्षणिक सत्र 2015-16 में नवंबर, 2015 तक के एकत्र आंकड़ों के अनुसार सरकारी स्कूलों में पढऩे वाला हर छठा बच्चा खून की कमी का शिकार है। बोर्ड की परीक्षाओं में भले ही जिले की लड़कियां लडक़ों से बेहतरीन अंक लाती हैं, लेकिन उनमें भी खून की भारी कमी पाई गई है। आलम यह है हर 7वें छात्र में खून की कमी है।

80 हजार लड़कियों में खून की कमी – विभाग की स्कूल हेल्थ शाखा की ओर से इस शैक्षिक वर्ष में गत वर्ष नवंबर तक कुल एक लाख 55 हजार 614 बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की। इनमें 80 हजार 13 लड़कियां और 75 हजार 601 लडक़े हैं। हैरत की बात है कि इनमें 20 हजार 535 बच्चों में खून की कमी है, जिनकी उम्र डेढ़ महीने से 18 वर्ष तक की है। इनमें 11485 लड़कियां व 9050 लडक़े हैं।
विभाग ने छह सप्ताह से छह महीने तक की उम्र के कुल 7648 बच्चों के शरीर खून, विटामिन व अन्य तरह की खून से संबंधी जांच की गई, इनमें से 6781 बच्चों में खून की कमी पाई गई। इनमें से 3393 लड़कियां और 3388 लडक़े हैं,

विभाग की टीम की तरफ से इन बच्चों को नियमित तौर पर आयरन की एवं शरीर को स्वस्थ रखने की दवाओं को दिया जा रहा है और बच्चों के शरीर की नियमित जांच करवाई जा रही है।
इसी तरह विभाग की टीम ने स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थियों में भी खून और शरीर में अलग-अलग विटामिन की कमी को जांचा गया, टीम ने स्कूल में छह वर्ष से 18 वर्ष तक की उम्र के कुल 14146 बच्चों की जांच हुई, इनमें से 13754 विद्यार्थियों में खून की कमी पाई गई। खून की कमी को झेलने वालों में 8092 लड़कियां व 5662 लडक़े हैं।

इनके अलावा 286 ऐसे विद्यार्थी हैं, जिनके शरीर में विटामिन-ए व डी की कमी है विटामिन -ए व डी की कमी से शारीरिक दुख को झेलने वालों में 144 छात्र व 142 छात्राएं हैं।