जननी सुरक्षा योजना के दौरान भी नहीं रुक रहीं प्रसव के दौरान मौतें?

टिहरी गढ़वाल

उत्तराखंड भारत में प्रसव के दौरान बड़ी संख्या में जच्चा-बच्चा की मौत हो जाती है  इसे रोकने के लिए गरीब गर्भवती महिलाओं का प्रसव अस्पताल में कराने के लिए कार्यक्रम शुरू किया गया, लेकिन इसके बावजूद प्रसव के दौरान होने वाली मौतों में कमी नहीं देखी जा रही है।
एक नए अध्ययन से यह जानकारी सामने आई है इस अध्ययन में कहा गया है कि 2005 में स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव कराने के लिए गरीब गर्भवती महिलाओं को नकद मदद मुहैया कराने का कार्यक्रम शुरू किया गया। जननी सुरक्षा योजना कार्यक्रम लागू होने के बाद बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं घर की बजाय स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर प्रसव कराने लगीं, लेकिन भारत में घटिया स्वास्थ्य प्रणाली होने के कारण प्रसव के दौरान होने वाली मौत के आंकड़ों में कोई कमी नहीं आई है। अध्ययनकर्ता भारत रणदिवे का कहना है कि नकद राशि के हस्तांतरण से स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोतरी नहीं होती।
रणदिवे ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा, इस कार्यक्रम से सेवाओं का लाभ लेने में तो बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन इससे प्रसव के दौरान होने वाली मौतों में कोई कमी नहीं देखी गई है। इसका कारण सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए अच्छे स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। रणदिवे ने अपने अध्ययन में पाया कि भारत के गरीब राज्यों में गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आपातकालीन प्रसूति देखभाल सुविधाओं का अभाव है जोकि प्रसूति के दौरान होने वाली मौतों को रोकने के लिए बेहद जरूरी है।
इस शोध में रणदिवे ने नौ राज्यों में गरीब और अमीर लोगों के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया।
उन्होंने अपने अध्ययन में पाया कि इन नौ कम विकसित राज्यों में एक लाख प्रसूति में अतिरिक्त 135 मृत्यु देखी गई, जो कि कार्यक्रम शुरू होने के बाद अमीर क्षेत्रों की तुलना में चार गुना पीछे था।
अध्ययन में कहा गया है कि कार्यक्रम चलाए जाने के बाद पिछले 5 सालों में स्वास्थ्य केंद्रों पर होने प्रसव का आंकड़ा 20 फीसदी से बढक़र 49 फीसदी हो गया, लेकिन इसके बावजूद जिला स्तर पर प्रसूति के दौरान होने वाली मौत के आंकड़ों में कोई कमी नहीं देखी गई।