पूर्व रजिस्ट्रार ने फार्मेसी काउंसिल को लगाई लाखों की चपत

अंबाला

हरियाणा चौकसी ब्यूरो द्वारा हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के पूर्व रजिस्ट्रार एस.एस. नेहरा के खिलाफ जांच में काउंसिल का लाखों रुपए गबन करने का खुलासा होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। के.सी. गोयल ने राज्य चौकसी ब्यूरो से जानकारी मांगी थी जो न तो राज्य जन सूचना अधिकारी ने उपलब्ध करवाई और न ही प्रथम अपील अधिकारी ने उपलब्ध करवाई। गोयल ने राज्य सूचना आयोग में अपील की जिस पर आयोग ने कार्रवाई करते हरियाणा विजीलैंस को नोटिस दिया है। नोटिस में सूचना आयुक्त ने 9 फरवरी डायरेक्टर जनरल विजीलैंस हरियाणा के स्टेट पब्लिक इंफॉमेंशन ऑफिसर को पेश होने के आदेश दिए हैं। विजीलैंस ब्यूरो ने एस.एस.नेहरा द्वारा काउंसिल के पैसों के गबन की जांच में खुलासा किया था।

हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन कृष्ण चंद गोयल ने उक्त आरोप लगाते हुए पत्रकारों को बताया कि विजीलैंस ने 2007 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों के बाद एस.एस. नेहरा के खिलाफ जांच शुरू की थी, जिसकी रिपोर्ट 2012 में विजीलैंस ब्यूरो ने सौंप दी थी। इस रिपोर्ट में सामने आया कि नेहरा ने वर्ष 1992 से 2007 तक काउंसिल का रजिस्ट्रार रहते काउंसिल के लाखों रुपए का गबन किया है। साथ काउंसिल के नियम 131, 132, 134, 139, 141 की जमकर अवहेलना की।

कृष्ण चंद गोयल ने बताया कि काउंसिल का कोई भी रजिस्ट्रार नियम 131 के तहत 100 रुपए से अधिक नहीं रख सकता, लेकिन विजीलैंस रिपोर्ट में सामने आया कि नेहरा ने 16 लाख रुपए से भी अधिक कैश अपने पास रखे हुए थे। रूल नंबर 139 के तहत रजिस्ट्रार केवल 50 रुपए ही अपने मर्जी से खर्च कर सकता है, लेकिन पूर्व रजिस्ट्रार एस.एस. नेहरा ने 45 लाख रुपए से अधिक पैसा अपनी मर्जी से खर्च कर दिया, जबकि काउंसलि की आमदनी केवल 16 लाख रुपए दिखाई।

गोयल ने बताया कि सेक्शन 26 के तहत काउंसिल का स्टाफ केवल काउंसिल ही नियुक्त कर सकती है, लेकिन रजिस्ट्रार नेहरा ने अपने विश्वासपात्र नौकरी पर रखे। जब नेहरा की नियुक्ति हुई, तो उसे 1600-2000 रुपए के ग्रेड पर नियुक्त किया गया था, लेकिन विजीलैंस जांच में सामने आया कि नेहरा ने काउंसिल के खाते से अधिक पैसा अपने पास वसूल कर काउंसलि को घाटे में डालने का काम किया। गोयल ने बताया कि हरियाणा सरकार ने नेहरा को 2003 व 2005 में 1 लाख 38 हजार रुपए रिकवरी के लिए नोटिस दिया, जो कि आज तक रिकवरी नहीं की गई।
2007 में हाईकोर्ट के फैसले के बाद नेहरा ने काउंसिल का चार्ज सौंपने से इंकार कर दिया था लेकिन हरियाणा सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी बना दी, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक (प्रशासनिक) को काउंसिल का कार्यभार दिलवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिन्होंने काउंसलि का ताला खुलवाया, तो अलमारी से 7 लाख 7 हजार 158 रुपए रिकवर हुए थे, जो कि उसी समय काउंसलि के खाते में जमा करवा दिए गए।

विजीलैंस ब्यूरो ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि गबन हुआ है, लेकिन कितना हुआ उसका आंकलन करना मुशकिल है।

के.सी. गोयल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मांग की है कि नेहरा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।