पहले मरीजों का इलाज नही, नया सर्वे शुरू

बारां / राजस्थान

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गत वर्ष चिन्हित किए गए  करीब 15 सौ बाल रोगियों का अब तक इलाज नहीं कराया गया, और अब नए बाल रोगियों की तलाश करने के लिए सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया। गत वर्ष स्क्रीनिंग कर हृदय रोगी समेत विभिन्न जटिल रोग से पीडि़त 7 हजार 349 बच्चों को उच्च चिकित्सा संस्थान पर इलाज कराने के लिए चिन्हित किया था।

यह रहे इलाज से वंचित रहे बच्चों में सबसे अधिक अटरू व अन्ता ब्लॉक क्षेत्र के बच्चे है। जिले में गत 14 नवम्बर 2014 से 30 जुलाई 2015 के दौरान सातों ब्लॉक से  चिन्हित कर रैफर किए गए 7349 बच्चों में से अन्ता के 366 अटरू के 416, बारां के 270 छीपाबड़ौद के 205, किशनगंज के 195, छबड़ा के 85 व शाहाबाद के 36 बच्चे इलाज की राह तकते रह गए।
7925 की स्क्रीनिंग-अब विभाग की ओर से एक जनवरी से कार्यक्रम शुरू कर आंगनबाडिय़ों पर फूलवाड़ी कार्यक्रम के तहत 7925 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 3895 मेल व 4030 फिमेल बच्चे है। वर्तमान में भी आंगनबाड़ी के अलावा स्कूलों में बीमार बच्चों के चिन्हिकरण के लिए स्क्रीनिंग की जा रही है।

यह रहा मुख्य कारण जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में जिले के आयुष चिकित्सकों की टीम लगाई हुई थी, टीम ने बच्चों का सर्वे कराकर उन्हें उच्च संस्थानों के लिए रैफर भी करा दिया, कुछ को ले जाकर मेडिकल कॉलेज स्तर पर इलाज भी कराया, लेकिन बाद में सरकार के निर्देशानुसार आयुष चिकित्सकों को उनके मूल पदस्थापन स्थन पर भेज दिया गया तथा उनके शेष बच्चे व उनके परिजन तो अब तक इलाज होने की बांट जोह रहे है। कई बच्चों के परिजन सम्बंधित कर्मचारियों का फोन करते रहते है। जिन चार बच्चों का इलाज हुआ उनमें दो  कोयला व एक बच्चा बावड़ीखेड़ा का है तथा एक बच्चा किशनगंज क्षेत्र का है।

नोडल अधिकारी का कहना है कि करीब डेढ़ हजार बच्चों का इलाज नहीं होने के विभिन्न कारण रहे हैं। कुछ बच्चों का पहले से इलाज जारी था, उन्हें रैफर कर दिया तो परिजनों ने जयपुर तक जाने में रुचि नहीं ली। इस वर्ष पहले वाले बच्चों को प्रथम प्राथमिकता दी जाएगी। सभी चिन्हित बच्चों का इलाज कराने का प्रयास है।