रोगियों को खिला दीं सवा दो लाख अमानक दवाएं

धौलपुर / राजस्थान

चिकित्सा विभाग की लापरवाही के कारण जिले के हजारों लोगों की जान पर सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि विभाग ने करीब सवा दो लाख गोली और इंजेक्शन अस्पतालों के जरिए मरीजों को खिला दिए हैं जो कि अमानक पाए गए हैं। विभाग में मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना में जब भी कोई दवा आए तो उसकी जांच सरकारी लैब में कराई जानी चाहिए। जांच में दवाएं अमानक पाए जाने पर दवाओं पर रोक लगा दी जाती है। सही पाए जाने पर ही वितरित की जाती है। इन दवाओं के मामले में ऐसा नहीं किया गया है। इससे अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप भी लगने शुरू हो गए हैं। इन दवाओं की बाजार में कीमत करीब 50 लाख रुपए आंकी जा रही है।

मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत माह जून से अगस्त, 15 तक लेबोरेट्री नाम की कंपनी ने जीवन रक्षक दवाओं सहित विभिन्न मर्ज की दो लाख 25 हजार 951 दवाएं भेजीं। इसमें इंजेक्शन और टेबलेट दोनों ही शामिल हैं। इन धौलपुर के ड्रग वेयर हाउस में पहुंचाया गया। यहां से इन दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए विभागीय लेब को भेज दिए गए। जांच रिपोर्ट आने का इंतजार किए बिना ही दवाओं की आपूर्ति कर दी गई। जिले के सबसे बड़े डॉ. मंगलसिंह सामान्य चिकित्सालय सहित अन्य में इनकी सप्लाई की।

हाल में 29 दिसंबर, 15 को राजस्थान मेडीकल सर्विस कोरपोरेशन ने सभी दवाओं के अमानक पाए जाने की रिपोर्ट जिले के अधिकारियों को भेज दी। जिम्मेदार अधिकारियों ने पहले तो मामले का दवाने की पूरी कोशिश की, जब मामला पूरी तरह खुल गया तो दवाओं को मंगाने के लिए पत्र व्यवहार शुरू करना शुरू कर दिया है। इन दवाओं की कीमत लाखों रुपए आंकी जा रही है। बाजार में इन दवाओं की कीमत करीब 50 लाख रुपए आंकी जा रही है।

दवाओं का हो गया उपयोग – नियमानुसार जिले के ड्रग वेयर हाउस से अस्पतालों में दवाओं को वितरण तभी होता है, जब वह उपयोग के लायक होती हैं। जब अमानक दवाओं की खेप अस्पतालों में पहुंची तो इनका उपयोग शुरू हो गया। अमानक पाई गई दवाओं की आपूर्ति अस्पतालों में जुलाई से शुरू हुई थी। जबकि विभाग ने जनवरी में दवाएं मंगना शुरू किया है। अब तक ज्यादातार दवाएं का उपयोग हो चुका है। गनीमत यह हुई कि जिले में कहीं पर भी अमानक दवाओं से कोई हादसा नहीं हुआ है।