निजी अस्पताल बिल पेंडिंग पर भी शव देने से नहीं कर सकेंगे मना

चंडीगढ़। हरियाणा राज्य में अब निजी अस्पताल बिल पेंडिंग होने की स्थिति में भी शव देने से मना नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में जल्द ही विधेयक लाया जाएगा। विधेयक को लेकर गृह मंत्री अनिल विज इसका अध्ययन करने के आदेश भी जारी कर चुके हैं।

मनोहर सरकार विधेयक लाएगी

यह कवायद प्रदेश में शव को लेकर प्रदर्शन और उसका अंतिम संस्कार नहीं करने की जिद करने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए की जा रही है। इसके लिए मनोहर सरकार विधेयक लाने की तैयारी में है। इसके साथ ही यह प्रावधान इस कानून में रखा जा रहा है कि कोई भी निजी अस्पताल बिल चुकता नहीं करने की स्थिति में शव को देने से इनकार नहीं कर सकता। पूर्व में होने वाली घटनाओं में खासतौर पर निजी अस्पताल संचालकों द्वारा शव भुगतान होने की स्थिति में ही दिया जाता था।

ली जा रही कानूनी राय

मृत शरीर सम्मान बिल को लेकर गृह मंत्री पहले ही राजस्थान व अन्य राज्य का अध्ययन करने को कह चुके हंै। उसके बाद भी इस बिल को इसी सत्र में लाने की तैयारी में सरकार है। इस पर कानूनी राय भी ली जा रही है। इस बिल के बाद निजी अस्पताल का बकाया भुगतान होने के बावजूद अस्पतालों को शव देना होगा।

ड्राफ्ट में संशोधन जारी

गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की आपत्ति के बाद हरियाणा मृत शरीर के सम्मान विधेयक (2023) ड्राफ्ट में संशोधन किया जा रहा है। वहीं, इस बिल को लेकर पहले अधिकारी अध्ययन रिपोर्ट भी तैयार कर मंत्री को देंगे। इसके बाद ही यह बिल आ सकेगा। इसमें मृत शरीर के सम्मान को लेकर इलाज का बिल बकाया होने की स्थिति में भी अस्पताल संचालक नहीं रख पाएंगे। विधेयक के पहले ड्राफ्ट में शव को सडक़ पर रखकर जाम लगाने और सरकारी संपत्ति फूंक दिए जाने जैसी घटनाओं पर भी रोक लगाने की योजना है।

व्यावहारिक जानकारी जुटाई जा रही

गृह मंत्री ने ड्राफ्ट को लेकर आशंका जाहिर की थी। जहां पर भी यह लागू है वहां की अध्ययन रिपोर्ट मंगाने की बात कही गई है। अधिकारी इस दिशा में काम में जुटे हैं। विज का कहना है कि ऐसे विधेयक लाने से पहले व्यावहारिक जानकारी जुटाना जरूरी है। इसके साइड इफेक्ट क्या हैं? जिस राज्य में यह कानून लागू है, वहां का अध्ययन करना चाहिए।
इस विधेयक को लाने के पीछे की मंशा मृत शरीर की गरिमा को सुनिश्चित करना है। विधेयक ड्राफ्ट में यह शामिल किया जा रहा है कि किसी की मौत होने पर उसके शरीर की गरिमा को ठेस पहुंचाना कानूनी तौर से गलत है। इसके कारण ही अस्पताल संचालकों को भी इसमें पाबंद किया जा रहा है। इससे गरीब व्यक्ति की मौत होने पर शव को पैसे नहीं होने के कारण रोक लिया जाता है। परिजनों की गुहार भी अस्पताल संचालक नहीं सुनते। वे भुगतान करने के लिए अड़े रहते हैं। इसके अलावा, शव रखकर सडक़ जाम करने के मामले में शव के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी प्रशासन को ही दी जाएगी।

विधेयक में जिला प्रशासन को होगा अधिकार

मृत शरीर सम्मान विधेयक में एसपी, डीसी, डीएसपी, एसपी सभी को अधिकार दिए जाएंगे। साथ ही वे पूरे मामले में पहल करेंगे कि शव की बेकद्री न हो। पुलिस अफसरों की ओर से परिजनों को राजी किया जाएगा। यदि ऐसा नहीं होता तो उन्हें संस्कार करने का पूरा अधिकार होगा। गृह विभाग की ओर से तैयार किए विधेयक को प्रदेश में सडक़ जाम की बढ़ रही घटनाओं को रोकना बताया गया है। प्रस्तावित विधेयक में कहा गया है कि इसके लागू होने से सार्वजनिक जगहों पर शव के साथ प्रदर्शन करने पर अंकुश लगेगा। इसमें सजा के साथ जुर्माने का प्रावधान तय किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की भी है गाइडलाइन

नेशनल हाइवे जाम करने के खिलाफ पहले से ही सुप्रीमकोर्ट की गाइड लाइन है। इसमें पुलिस मुकदमा दर्ज करती है। शव रखकर जाम लगाने के अधिकांश मामलों में पुलिस असहाय नजर आती है। इस विधेयक में पड़ोसी राज्य राजस्थान का हवाला दिया गया है। वहां पर उक्त कानून के तहत शव रखकर सडक़ जाम करने पर 2 वर्ष की सजा का प्रावधान है। शव के साथ धरना-प्रदर्शन में शामिल होकर उकसाने वाले राजनेताओं के खिलाफ 5 वर्ष की सजा तय है। यदि वह विभिन्न मांगों को लेकर शव के साथ सडक़ पर प्रदर्शन करते हैं तो एक वर्ष की सजा व जुर्माना लग सकता है।

हरियाणा मृत शरीर सम्मान विधेयक-2023 होगा नाम

यहां पर बता दें कि हरियाणा मृत शरीर सम्मान विधेयक-2023 का नाम दिए जाने का प्रस्ताव है। फिलहाल विधेयक को लेकर गहन चिंतन मंथन का दौर चल रहा है। प्रस्ताव पास होने के बाद राज्य में शवों को लेकर रास्ते जाम, धरने व प्रदर्शन पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।

विधेयक में एक साल की सजा और पचास हजार जुर्माना तक की व्यवस्था की गई है। इस विधेयक के अनुसार परिजन अगर समय रहते शव का संस्कार नहीं करते, ना ही बात मानते हैं, तो थाना प्रभारी, डीएसपी, एसडीएम, उपायुक्त प्रशासन की जानकारी में डालकर 12 घंटे के भीतर संस्कार कर देंगे।

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