141 डॉक्टरों के भरोसे 18 लाख लोगों की जिंदगियां

छतरपुर / बिहार
मैन पॉवर की समस्या से जूझ रहे शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। जिले में डॉक्टरों की कमी से इलाज के अभाव में जिले में रोजाना कोई न कोई मरीज दम तोड़ रहा है। शहरी क्षेत्र ही नहीं ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव है। हालात यह हैं कि जिले की 17 लाख से अधिक लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सिर्फ 141 डॉक्टरों के भरोसे है । जिले में 91 डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हुए है। ऐसे में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की हवा निकल रही है।

स्वीकृत पद पड़े खाली – जिला अस्पताल के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों का इलाज किए जाने की व्यवस्था है। बावजूद इसके जिले की आबादी के अनुरूप डॉक्टरों के पद नहीं हैं। जितने पद जिले
में स्वीकृत हैं उनमें से बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा  सबसे ज्यादा बुरा हाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना कर रहा है। वहीं जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के लोग सौ किमी दूर से लोग इलाज के लिए आते हैं लेकिन सरकारी सुविधा के नाम पर उनके साथ छलावा हो रहा है।

रेफर सेंटर बने अस्पताल – स्वीकृत पदों के सापेक्ष पर्याप्त डॉक्टरों के तैनात न होने से अस्पताल रेफर सेंटर कर बन कर रह गए हैं। हालात यह हैं कि नाजुक हालत होने पर मरीजों को जहां सीएचसी व पीएचसी से जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर अधिकांश मरीजों को ग्वालियर के लिए रेफर कर देते हैं। ऐसे में मरीजों को परेशानी होती है। कई मरीज ग्वालियर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
सी.एम.एच.ओ. का कहना है किसीएचसी व पीएचसी में रिक्त चल रहे पदों पर डॉक्टरों की तैनाती को लेकर शासन को अवगत कराया गया है। समय-समय पर पत्र भी भेजे जाते हैं। डॉक्टरों को मरीजों के इलाज में पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हैं।